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Jitne muhn utni baten hindi kahani | हिंदी कहानी जितने मुंह उतनी बातें

  हिंदी कहानी - जितने मुंह उतनी बातें बहुत समय पहले एक व्यापारी था उसके पास एक गधा था वह और उसका बेटा प्रत्येक सुबह अपना सामान गधे पर रखकर शहर बेचने जाते थे और शाम को शहर से वापस लौटते समय गधे पर कोई सामान नहीं होता था एक दिन जब शाम को व्यापारी और उसका बेटा गधे के साथ वापस लौट रहे थे तो रास्ते में एक राहगीर व्यापारी से बोला कि - "गधे पर कोई सामान नहीं है। तुम अपने बेटे को गधे  पर बिठा दो।"  व्यापारी को राहगीर की बात उचित लगी उसने अपने बेटे को गधे पर बिठा दिया और आगे चल पड़ा । कुछ दूरी तय करने के बाद उन तीनों को फिर से एक राहगीर मिला बेटे को गधे  पर देखकर बोला बूढ़ा बाप तो पैदल चल रहा है और गधे पर आराम से सवारी कर रहा है ।   व्यापारी का बेटा गधे पर से उतर कर अपने पिता से बोला - "पिताजी आप बैठ जाइए।"  व्यापारी गधे पर बैठ गया और चल पड़ा ।कुछ दूर आगे चलकर फिर से एक और राहगीर मिला उसने कहा कि- "अरे भाई गधे पर अपने बेटे को भी बिठा लो इतना छोटा बच्चा पैदल चल रहा है।" राहगीरके कहने पर व्यापारी और उसके पुत्र गधे पर बैठ कर चल पड़े । गधा वजन अधिक होने के कारण ...

प्रेरणा कविता | Prerana dene wali kavita

  प्रेरणा कविता प्रेरणा देती हैं मुझे ये धरा , जो हम सब को देती है वत्सल निरा। हमारा पालन-पोषण करती है, हमें अपनी गोद में उठाए घूमती है । बिना रुके बिना थके अपनी धुरी पर, ममता से भरा हुआ ह्रदय लेकर। प्रेरणा देते हैं मुझे ये खग, नीला अम्बर है इनका जग। जो आंधियों में भी उड़ानें भरते  हैं,  फड़फड़ा कर बार - बार गिरते हैं। कभी कमजोर नहीं हुआ इनका हौंसला, तिनका- तिनका जोड़ ये बनाते घोंसला। प्रेरणा देती हैं मुझे ये चींटियां , जो चढ़ जाती हैं ऊंची चोटियां। अथाह परिश्रम है इनका प्रण, कर्मक्षेत्र है उनका रण। नहीं है जग में ऐसा उपमान, कोई करता नहीं उद्यम इनके समान। प्रेरणा देती हैं मुझे ये नदियां, जन्मदात्री हैं हिमालय की चोटियां। स्वयं अपने रास्ते बनातीं हैं, जो शांति से लम्बा सफर तय करती हैं। न जाने कितने खेतों को सींचती हैं, न जाने कितने जीवों की तृष्णा बुझाती है। प्रेरणा देते हैं मुझे ये पुष्प, जो कभी किसी से नहीं होते रुष्ट। ये सूर्य की भीषण गर्मी सहकर भी, सर्द हवाओं के थपेड़े सहकर भी, बारिशों के मौसम में भी भीगते हैं।  फिर भी न जाने क्यों ये मुस्कुराते रहते हैं ? Written...

आशीष हिंदी कविता | blessing poem | Ashish kavita

कविता   झुका है तुम्हारा जो शीष, हम देते हैं तुमको आशीष। इस जीवन पथ पर, अपनी इंद्रियों को वश में कर। ज्ञान का दीपक जलाकर, अंधेरों का सामना करना डटकर, पाना विजय हर एक बाधा पर। झुका है तुम्हारा जो शीष, हम देते हैं तुमको आशीष। ना करना तुम कभी अभिमान, करना ना किसी का अपमान। सबसे मिल जुल कर रहना, अकिंचन का सहयोग करना। कर्तव्य पथ पर कभी ना रुकना, सरल सरिता बनकर बहना। झुका है तुम्हारा जो शीष, हम देते हैं तुमको आशीष। क्षितिज की ऊंचाइयों को छू कर भी, रखना अपने पांव जमीन पर । नीलम द्वारा लिखित