आशीष हिंदी कविता | blessing poem | Ashish kavita


 झुका है तुम्हारा जो शीष,

हम देते हैं तुमको आशीष।


इस जीवन पथ पर,

अपनी इंद्रियों को वश में कर।


ज्ञान का दीपक जलाकर,

अंधेरों का सामना करना डटकर,

पाना विजय हर एक बाधा पर।


झुका है तुम्हारा जो शीष,

हम देते हैं तुमको आशीष।


ना करना तुम कभी अभिमान,

करना ना किसी का अपमान।


सबसे मिल जुल कर रहना,

अकिंचन का सहयोग करना।


कर्तव्य पथ पर कभी ना रुकना,

सरल सरिता बनकर बहना।


झुका है तुम्हारा जो शीष,

हम देते हैं तुमको आशीष।


क्षितिज की ऊंचाइयों को छू कर भी,

रखना अपने पांव जमीन पर ।


नीलम द्वारा लिखित