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River Pollution part 4 नाला पानी की राव से गंगा तक: देहरादून की एक नदी, प्रदूषण की पूरी कहानी

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एक स्थानीय नदी-तंत्र की तस्वीरों, सरकारी रिपोर्टों और पर्यावरणीय सवालों पर आधारित विशेष लेख देहरादून को अक्सर पहाड़ों, हरियाली और स्वच्छ हवा के लिए जाना जाता है। लेकिन शहर के बीच से बहने वाले जलस्रोतों की कहानी देखें, तो एक दूसरी तस्वीर भी सामने आती है नदी किनारे जमा कचरा, पानी के साथ बहता अपशिष्ट, घनी होती बस्तियाँ और नदियों के प्राकृतिक रास्तों पर बढ़ता दबाव। नाला पानी की राव की Google Maps तस्वीरें इसी समस्या की ओर ध्यान खींचती हैं। तस्वीरों में नदी के किनारे प्लास्टिक और दूसरे ठोस कचरे जैसे पदार्थ दिखाई देते हैं। कुछ स्थानों पर किनारे पर गंदला पानी भी नजर आता है। ये तस्वीरें अपने आप में पानी की रासायनिक गुणवत्ता का प्रमाण नहीं हैं, लेकिन ये एक जरूरी सवाल उठाती हैं: हमारे शहरों का कचरा और गंदा पानी आखिर जाता कहाँ है? इस सवाल का जवाब केवल एक नाले या एक पुल तक सीमित नहीं है। इसे समझने के लिए नाला पानी की राव, रिस्पना, सुसवा और गंगा के बीच के संबंध को देखना होगा। 1\. नाला पानी की राव क्यों महत्वपूर्ण है? नाला पानी की राव देहरादून के शहरी जल-तंत्र का हिस्सा है। स्थानीय स्तर पर यह ...

River Pollution part 3 गंगा में आखिर जाता क्या है? सीवेज, नाले और शहरों की वह कहानी जो नदी को प्रदूषित करती है

गंगा को देखकर अक्सर पहला सवाल होता है “गंगा इतनी प्रदूषित क्यों है?” लेकिन शायद सवाल इस तरह पूछा जाना चाहिए: “गंगा में आखिर पहुँच क्या रहा है?” क्योंकि नदी अपने आप गंदी नहीं होती। उसमें जो कुछ पहुँचता है, उसका कोई न कोई स्रोत होता है। कहीं वह शहर का सीवेज है। कहीं industrial wastewater। कहीं solid waste। कहीं agricultural runoff। और कई जगह ये सभी मिलकर नदी पर दबाव बनाते हैं। National Mission for Clean Ganga (NMCG) के अनुसार, Ganga basin में लगभग 12,000 million litres per day (MLD) sewage generate होने का अनुमान दिया गया है । NMCG की pollution-threat information में treatment capacity लगभग 4,000 MLD बताई गई है। हालांकि यह figure NMCG की वेबसाइट पर उपलब्ध एक standing estimate है और इसे 2026 की exact current capacity नहीं माना जाना चाहिए। यानी गंगा की pollution story को समझने के लिए हमें सबसे पहले सीवेज की कहानी समझनी होगी। शहर गंगा को क्या देते हैं? गंगा के किनारे बसे शहरों का नदी के साथ रिश्ता हजारों साल पुराना है। शहर नदी से पानी लेते हैं। नदी के किनारे बसते हैं। व्य...

River Pollution — Part 2 : गंगा भारत की जीवनरेखा, आस्था और प्रदूषण की पूरी कहानी

भारत में शायद ही कोई दूसरी नदी हो जिसका नाम लेते ही भूगोल, इतिहास, संस्कृति, धर्म, अर्थव्यवस्था और राजनीति सब एक साथ सामने आ जाएँ। गंगा सिर्फ एक नदी नहीं है। करोड़ों लोगों के लिए वह आस्था है। किसानों के लिए पानी का स्रोत है। शहरों के लिए जल और drainage system का हिस्सा है। हजारों गांवों के लिए जीवन का आधार है। और लाखों लोगों की रोज़मर्रा की अर्थव्यवस्था उससे जुड़ी हुई है। लेकिन इसी गंगा की कहानी का दूसरा पक्ष भी है। शहरों का सीवेज इसमें जाता है। औद्योगिक प्रदूषण इसे प्रभावित करता है। कचरा नदी तक पहुँचता है। कई जगह प्राकृतिक flow पर दबाव है। और कई stretches में water quality आज भी चिंता का विषय है। तो सवाल यह है  जिस नदी को भारत की जीवनरेखा कहा जाता है, उसकी हालत आखिर ऐसी क्यों हुई? और इससे भी बड़ा सवाल दशकों से चल रहे सफाई अभियानों के बाद आज गंगा कहाँ खड़ी है? गंगा कहाँ से शुरू होती है? गंगा की कहानी हिमालय से शुरू होती है। उत्तराखंड में Gangotri Glacier से निकलने वाली धारा को भागीरथी कहा जाता है। आगे देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा का संगम होता है और इसके बाद नदी को गंगा के नाम स...