Posts

River Pollution — Part 2 : गंगा भारत की जीवनरेखा, आस्था और प्रदूषण की पूरी कहानी

भारत में शायद ही कोई दूसरी नदी हो जिसका नाम लेते ही भूगोल, इतिहास, संस्कृति, धर्म, अर्थव्यवस्था और राजनीति सब एक साथ सामने आ जाएँ। गंगा सिर्फ एक नदी नहीं है। करोड़ों लोगों के लिए वह आस्था है। किसानों के लिए पानी का स्रोत है। शहरों के लिए जल और drainage system का हिस्सा है। हजारों गांवों के लिए जीवन का आधार है। और लाखों लोगों की रोज़मर्रा की अर्थव्यवस्था उससे जुड़ी हुई है। लेकिन इसी गंगा की कहानी का दूसरा पक्ष भी है। शहरों का सीवेज इसमें जाता है। औद्योगिक प्रदूषण इसे प्रभावित करता है। कचरा नदी तक पहुँचता है। कई जगह प्राकृतिक flow पर दबाव है। और कई stretches में water quality आज भी चिंता का विषय है। तो सवाल यह है  जिस नदी को भारत की जीवनरेखा कहा जाता है, उसकी हालत आखिर ऐसी क्यों हुई? और इससे भी बड़ा सवाल दशकों से चल रहे सफाई अभियानों के बाद आज गंगा कहाँ खड़ी है? गंगा कहाँ से शुरू होती है? गंगा की कहानी हिमालय से शुरू होती है। उत्तराखंड में Gangotri Glacier से निकलने वाली धारा को भागीरथी कहा जाता है। आगे देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा का संगम होता है और इसके बाद नदी को गंगा के नाम स...

कल्याणी: वह नदी जिसे रुद्रपुर ने नाले में बदल दिया

एक नदी, 184 नाले, बारिश का पानी और तैरता हुआ कचरा—आखिर कहानी क्या है? रुद्रपुर में बारिश शुरू होती है तो एक अजीब विरोधाभास दिखाई देता है। शहर में एक नदी बहती है - कल्याणी नदी  रुद्रपुर   । फिर भी बारिश के बाद कई जगह पानी भर जाता है। और जिस नदी में बारिश का पानी आसानी से बह जाना चाहिए, उसी नदी में कचरा तैरता दिखाई देता है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कल्याणी नदी प्रदूषित क्यों है। सवाल इससे बड़ा है- जब किसी शहर के बीच एक नदी मौजूद हो, तो फिर बारिश का पानी सड़क पर क्यों खड़ा होता है और नदी में कचरा क्यों बहता है? यहीं से कल्याणी की कहानी शुरू होती है। यह कहानी सिर्फ एक नदी के प्रदूषण की नहीं है। यह कहानी है शहरीकरण, सीवेज, औद्योगिक गतिविधियों, कचरे, नदी के घटते प्राकृतिक प्रवाह और नदी के साथ हमारे बदलते रिश्ते की। और शायद कल्याणी की सबसे बड़ी त्रासदी यही है कि आज बहुत से लोगों के लिए वह नदी से ज्यादा एक नाले जैसी दिखाई देती है। कल्याणी आखिर है कहाँ? कल्याणी नदी उत्तराखंड के नैनीताल जिले के टांडा वन क्षेत्र से निकलती है। इसके बाद यह पंतनगर क्षेत्र के कृषि क्षेत्रों से होकर Integra...

नदी और जंगल के बिना हरियाली कैसे रेगिस्तान बन जाती है

Image
🌍  प्रस्तावना भारत की पहचान उसकी नदियों और हरे-भरे मैदानी क्षेत्रों से रही है। यहाँ की मिट्टी ने न सिर्फ़ अन्न उपजाया बल्कि पूरी सभ्यता को जीवन दिया। लेकिन इतिहास गवाह है कि जब नदियाँ सूख गईं और जंगलों का नाश हुआ, तो हरियाली धीरे-धीरे रेगिस्तान में बदल गई। राजस्थान इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। आज यही खतरा गंगा के मैदानी क्षेत्र उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल पर मंडरा रहा है। राजस्थान की पुरानी स्थिति: हरित भूमि और नदियाँ हज़ारों साल पहले राजस्थान का इलाका हरा-भरा था। सरस्वती , द्रष्टवती , कागारणी जैसी नदियाँ यहाँ बहती थीं। खेती-बाड़ी और पशुपालन खूब होता था। पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नगर (कालीबंगा, घग्घर क्षेत्र) इसी इलाके में बसे थे। जंगल और उपजाऊ मिट्टी घने जंगल भूजल को recharge करते थे। मिट्टी में नमी और उर्वरता बनी रहती थी। वर्षा संतुलित थी, और स्थानीय जलस्रोत सालभर भरे रहते थे। राजस्थान की वर्तमान स्थिति: नदियों का सूखना जलवायु परिवर्तन, भूकंपीय हलचलों और हिमालय से आने वाली नदियों का मार्ग बदल जाने से सरस्वती जैसी नदियाँ सूख ...