River Pollution part 3 गंगा में आखिर जाता क्या है? सीवेज, नाले और शहरों की वह कहानी जो नदी को प्रदूषित करती है
गंगा को देखकर अक्सर पहला सवाल होता है
“गंगा इतनी प्रदूषित क्यों है?”लेकिन शायद सवाल इस तरह पूछा जाना चाहिए:
“गंगा में आखिर पहुँच क्या रहा है?”
क्योंकि नदी अपने आप गंदी नहीं होती।
उसमें जो कुछ पहुँचता है, उसका कोई न कोई स्रोत होता है।
कहीं वह शहर का सीवेज है।
कहीं industrial wastewater।
कहीं solid waste।
कहीं agricultural runoff।
और कई जगह ये सभी मिलकर नदी पर दबाव बनाते हैं।
National Mission for Clean Ganga (NMCG) के अनुसार, Ganga basin में लगभग 12,000 million litres per day (MLD) sewage generate होने का अनुमान दिया गया है। NMCG की pollution-threat information में treatment capacity लगभग 4,000 MLD बताई गई है। हालांकि यह figure NMCG की वेबसाइट पर उपलब्ध एक standing estimate है और इसे 2026 की exact current capacity नहीं माना जाना चाहिए।
यानी गंगा की pollution story को समझने के लिए हमें सबसे पहले सीवेज की कहानी समझनी होगी।
शहर गंगा को क्या देते हैं?
गंगा के किनारे बसे शहरों का नदी के साथ रिश्ता हजारों साल पुराना है।
शहर नदी से पानी लेते हैं।
नदी के किनारे बसते हैं।
व्यापार करते हैं।
घाट बनाते हैं।
लेकिन शहरों की एक दूसरी व्यवस्था भी है—sewerage और drainage।
घर से निकलने वाला wastewater → sewer/drain → treatment plant → treated water.
कम-से-कम व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए।
लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब इस chain का कोई हिस्सा काम नहीं करता।
अगर sewer network अधूरा है, तो sewage drain में जाता है।
अगर drain नदी से जुड़ा है, तो pollution नदी तक पहुँच सकता है।
अगर STP मौजूद है लेकिन sewage वहाँ पहुँचता ही नहीं, तो plant की capacity कागज पर मौजूद हो सकती है लेकिन नदी को उसका फायदा नहीं मिलता।
यही कारण है कि सिर्फ “कितने STP बने?” पूछना पर्याप्त नहीं है।
हमें पूछना होगा—
कितना sewage पैदा होता है, कितना sewer में जाता है, कितना STP तक पहुँचता है और कितना वास्तव में standards के अनुसार treat होता है?
गंगा की pollution story में Kanpur क्यों महत्वपूर्ण है?
अगर गंगा में industrial pollution की बात हो और Kanpur का नाम न आए, तो कहानी अधूरी रहेगी।
Kanpur लंबे समय से leather और tannery industry के लिए जाना जाता है।
NMCG Kanpur की tanneries को Ganga basin में industrial pollution के महत्वपूर्ण sources में शामिल करता है। इसके अलावा Ramganga और Kali river catchments में distilleries, paper mills और sugar mills जैसे industries भी pollution concern के रूप में चिन्हित किए गए हैं।
लेकिन यहाँ भी एक बात स्पष्ट करनी जरूरी है।
इसका मतलब यह नहीं कि हर tannery या हर industry नदी में untreated waste डाल रही है।
Industries के लिए effluent treatment systems और Common Effluent Treatment Plants (CETPs) मौजूद हैं।
समस्या है—
क्या वे लगातार और निर्धारित standards के अनुसार काम करते हैं?
यहीं monitoring और enforcement की भूमिका आती है।
Kanpur के नालों की कहानी
CPCB की reports बताती हैं कि Kanpur में pollution का एक महत्वपूर्ण रास्ता drains हैं।
एक CPCB report में Sheetlabazar drain के बारे में दर्ज किया गया कि उसमें tannery effluent sewage के साथ मिल रहा था और उस समय surplus effluent का untreated discharge Ganga में जाने की बात दर्ज की गई थी।
CPCB के दूसरे documents में Kanpur के drains और industrial effluent को लेकर monitoring और regulatory directions का भी उल्लेख है। 2019–2024 के बीच CPCB ने UPPCB को industrial effluent discharge और Ganga में wastewater discharge को नियंत्रित करने के लिए कई directions जारी किए।
इससे एक बात साफ होती है:
नदी तक pollution पहुँचने के रास्ते को समझना उतना ही जरूरी है जितना नदी के पानी को test करना।
CETP बन जाने से क्या नदी साफ हो जाती है?
नहीं।
और यही एक बहुत महत्वपूर्ण point है जिसे अक्सर आम चर्चा में छोड़ दिया जाता है।
CETP यानी Common Effluent Treatment Plant कई industries के wastewater को collectively treat करने के लिए बनाया जाता है।
Kanpur के Jajmau में tannery cluster से जुड़ा CETP लंबे समय से मौजूद है।
लेकिन CPCB के पुराने assessment में CETP के operation, maintenance और bypass से संबंधित समस्याएँ दर्ज की गई थीं। उस assessment में untreated sewage के Ganga में bypass होने की भी बात दर्ज थी।
इसलिए किसी भी pollution-control infrastructure को केवल देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि pollution problem खत्म हो गई।
असल सवाल है:
Plant कितनी capacity पर चल रहा है?
Inlet कितना है?
Outlet water की quality क्या है?
क्या bypass हो रहा है?
Sludge का disposal कैसे हो रहा है?
यही असली environmental audit है।
Pollution सिर्फ नदी में दिखाई देने वाला कचरा नहीं है
जब हम नदी प्रदूषण की बात करते हैं तो अक्सर plastic bottles और floating garbage की तस्वीर सामने आती है।
लेकिन पानी के अंदर की pollution कहानी कहीं ज्यादा जटिल हो सकती है।
इसलिए scientists और pollution-control agencies कई parameters देखते हैं।
BOD
Biochemical Oxygen Demand बताता है कि पानी में मौजूद biodegradable organic matter को microorganisms द्वारा break down करने में कितनी oxygen की आवश्यकता है।
BOD बढ़ने का मतलब आम तौर पर पानी में organic pollution ज्यादा होने का संकेत हो सकता है।
DO
Dissolved Oxygen यानी पानी में घुली oxygen।
Aquatic life के लिए oxygen जरूरी है।
जब organic pollution बढ़ता है, microorganisms उसे break down करने में oxygen consume करते हैं।
इससे DO कम हो सकता है।
और अगर oxygen बहुत कम हो जाए तो aquatic ecosystem पर गंभीर दबाव पड़ सकता है।
यानी नदी की सतह देखकर साफ दिखाई देने वाला पानी ही पूरी कहानी नहीं बताता।
गंगा के pollution की एक और परत: Toxic pollutants
Industrial pollution की चिंता केवल इसलिए नहीं है कि वह sewage की मात्रा बढ़ाता है।
Industrial wastewater में ऐसे pollutants हो सकते हैं जो toxic या difficult-to-degrade होते हैं।
इसीलिए NMCG अपनी pollution-threat information में industrial pollution को volume के हिसाब से लगभग 20% बताता है, लेकिन उसके toxic और non-biodegradable nature के कारण इसे महत्वपूर्ण concern मानता है।
इस distinction को समझना जरूरी है।
Pollution का सबसे बड़ा volume और सबसे बड़ा environmental risk हमेशा एक ही चीज नहीं होते।
क्या हर गंदा drain गंगा में जाता है?
नहीं।
यह भी एक जरूरी distinction है।
Ganga basin में हजारों drains हैं, लेकिन हर drain सीधे main Ganga में discharge नहीं करता।
कई drains tributaries में जाते हैं।
कई sewage-treatment systems से जुड़े होते हैं।
कई drains को intercept और divert करने की कोशिश की गई है।
इसलिए गंगा की pollution mapping करते समय हमें तीन अलग-अलग रास्तों को देखना चाहिए:
Drain → Ganga
Drain → Tributary → Ganga
Sewage → STP → Treated discharge
यही कारण है कि river pollution को समझना एक पूरा basin-level investigation है।
फिर Namami Gange ने क्या बदला?
यहाँ से हमारी कहानी का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा शुरू होता है।
Namami Gange के तहत sewage treatment infrastructure पर बहुत बड़ा focus रखा गया है।
NMCG की 2023–24 annual report में 199 sewerage projects और लगभग 5,270.15 MLD potential STP capacity वाले projects का उल्लेख है; report के अनुसार इनमें 116 projects उस समय complete हो चुके थे।
लेकिन यहाँ फिर वही सवाल लौटता है:
Infrastructure बनाया जाना और pollution खत्म होना—क्या दोनों एक ही बात हैं?
नहीं।
क्योंकि sewage treatment की पूरी chain तभी काम करेगी जब—
घर → sewer → pumping → STP → treatment → treated discharge/reuse
हर stage ठीक से काम करे।
गंगा को साफ करने की सबसे कठिन लड़ाई नदी में नहीं, शहरों में है
यह शायद इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष है।
हम गंगा के घाट पर जाकर नदी की सफाई कर सकते हैं।
Surface पर floating waste उठा सकते हैं।
Riverfront सुंदर बना सकते हैं।
लेकिन अगर उसी शहर का untreated sewage किसी दूसरे drain से नदी में जा रहा है, तो समस्या वापस आ जाएगी।
इसलिए गंगा की सफाई की असली शुरुआत शायद नदी से कुछ किलोमीटर दूर होती है—
शहर के sewer network में।
और यही वजह है कि हमारी अगली जांच जरूरी है
अगर हम सच में जानना चाहते हैं कि गंगा कितनी साफ हुई है, तो हमें केवल सरकार की press release या सोशल मीडिया की तस्वीरें नहीं देखनी चाहिए।
हमें data देखना होगा।
हर बड़े शहर के लिए:
• Sewage generation कितना है?
• STP capacity कितनी है?
• Actual utilisation कितना है?
• कितने drains नदी तक पहुँचते हैं?
• कितने drains tapped/diverted हैं?
• STPs के outlet का BOD/COD/FC क्या है?
• Industrial units कितने हैं?
• कितने compliant हैं?
• नदी की water quality upstream और downstream में कैसी है?
और सबसे जरूरी—
क्या ये numbers समय के साथ बेहतर हो रहे हैं?
गंगा को समझने का सही तरीका
गंगा को एक single river की तरह मत देखिए।
इसे एक living network की तरह देखिए।
हिमालय में एक धारा।
फिर भागीरथी और अलकनंदा।
फिर गंगा।
फिर tributaries।
फिर शहर।
फिर drains।
फिर sewage।
फिर industries।
फिर floodplains।
और आखिर में समुद्र।
इस पूरे network में अगर एक जगह pollution पैदा होता है, तो उसका असर downstream तक पहुँच सकता है।
इसलिए—
गंगा को बचाने का मतलब सिर्फ गंगा के पानी को साफ करना नहीं है।
गंगा में पहुँचने वाले हर पानी को समझना है।
अगला सवाल
Part 1 में हमने पूछा था:
“गंगा प्रदूषित क्यों है?”
Part 2 का जवाब मिला:
“क्योंकि उसके basin के शहर और industries नदी तक pollution पहुँचाते हैं—और sewage इस कहानी का सबसे बड़ा हिस्सा है।”
लेकिन अब एक और बड़ा सवाल सामने आता है:
क्या गंगा में pollution कम हुआ है?
यानी
Namami Gange के बाद वास्तव में क्या बदला?
कितने STP बने?
कितने drains रोके गए?
Water quality में कहाँ सुधार हुआ?
कहाँ अभी भी समस्या है?
और सरकारी expenditure और actual river health के बीच क्या संबंध है?
यही हमारी Part 3 की कहानी होगी।