मेरी कहानी मेरी कविता | My story My poem in hindi

meri kahani kavita 

लोगों के मन में बहुत कालिख है,

सीएम अपनी मनमर्जी का मालिक है।


 मैं जब छोटा बच्चा था,

तभी अच्छा था !


वो बीता समय अब तो नहीं आएगा,

लेकिन यह  मुसाफिर कुछ बताएगा।


लाड प्यार से मैं पला था,

 खुली आंखें लेकर चला था ।


 मैं बड़ा मनमौजी था,

मस्ती का खोजी था।


लोगों के मन में बहुत कालिख है,

ये सीएम अपनी मनमर्जी का मालिक है।

मुझे नहीं तो शादियों का शौक,

 किसमें में दम था जो सीएम को ले रोक।


बच्चा बड़ा हुआ,

जूनियर से सीनियर बन खड़ा हुआ।


खेल कम पढ़ाई ज्यादा,

पेरेंट्स टॉप करने पर प्रॉमिस का वादा।


धीरे-धीरे समय निकल रहा था,

अच्छी बुरी बातें सीख रहा था।


मैं सबसे अलग था,

छोटी-छोटी बातों पर भड़क जाता था।


सीएम ने पुराने स्कूल को छोड़ा  था,

अपनी लाइफ को नई दिशा में मोड़ा था।


लोगों ने तालियां बजा दी है,

घर वालों ने लकीर का फकीर

बनने की सजा दी है।


 आप अपनी पढ़ाई पर कायम रहें,

 बड़े हो गए हैं अपने आदतें सुधार लो।


 मैं तो पत्थर की लकीर मिटता नहीं,

 बिना ब्रेक का खिलाड़ी रुकता नहीं है।


 हारना बुरी बात नहीं है,

 हारके मुस्कुरा देना सही है।


 एक दिन दुनिया को टैलेंट दिखाऊंगा,

 आगे की कहानी आगे बताऊंगा।


 तब तक यह सीएम अपनी जीत पर बरकरार है,

 इस बुराई की दुनिया में जंग के लिए तैयार है ।

written by super CM