सर्दी कविता | Sardi kavita | Winter hindi poem
सर्दी कविता sardi kavita
ओढ़ लो रजाई!
किसी को खांसी तो किसी को बुखार है,
बच्चे बूढ़े खांसे जोर से।
कुत्ते बिल्ली बोले,
आह ठंडी हवा चलती है चारों ओर से।
सब लोगों के दांत किट- किट करते हैं,
क्या बताएं जनाब ?
इंसान तो इंसान मच्छर भी,
गर्म हवा के लिए मरते हैं।
सर्दी आ गया भाई,
ओढ़ लो रजाई !
अस्पताल में भर्ती मरीज,
कुछ नए और कुछ पुराने हैं।
कुछ डॉ साहब की सुनते हैं,
और बाकी कम दिमाग हैं।
ये सीएम बड़ा हैरान है,
मच्छरों की गुस्ताखी देखकर परेशान है।
बिना इजाजत के घर में घुस आते हैं,
बेसुरा गाना सुनाते हैं ।
मच्छरों ने तो व्यापार बढ़ाया है,
कहता है तो हमने मोर्टीन लगाया है।
कीमती खून को पीते हैं,
सीएम को काट कर डेंगू का मरीज बनाते हैं।
यह भी भेदभाव है,
इनमें अखंडता का अभाव है।
अमीरों को कम गरीबों को ज्यादा काटते हैं,
जो कचरा फैलाते हैं उन्हें डालते हैं।
यह सुपर सीएम बहुत डरा है,
क्योंकि ऐसी जगह बनाई गई है ।
जहां मच्छरों की पूरी तैयारी है,
कोरोना के साथ मिलकर करनी है मारामारी।
सर्दी आ गया भाई,
ओढ़ लो रजाई !
आनंदो नाम के जनाब है,
जो गर्मी में देखता है एसी के ख्वाब है।
सर्दी में धुआं खा खा कर बुरा हाल है,
फिर भी धुआंदार आग में अपनी खाल को सेकते हैं।