प्रेरणा कविता | Prerana dene wali kavita



 प्रेरणा कविता

प्रेरणा देती हैं मुझे ये धरा ,

जो हम सब को देती है वत्सल निरा।


हमारा पालन-पोषण करती है,

हमें अपनी गोद में उठाए घूमती है ।


बिना रुके बिना थके अपनी धुरी पर,

ममता से भरा हुआ ह्रदय लेकर।


प्रेरणा देते हैं मुझे ये खग,

नीला अम्बर है इनका जग।


जो आंधियों में भी उड़ानें भरते  हैं,

 फड़फड़ा कर बार - बार गिरते हैं।


कभी कमजोर नहीं हुआ इनका हौंसला,


तिनका- तिनका जोड़ ये बनाते घोंसला।

प्रेरणा देती हैं मुझे ये चींटियां ,

जो चढ़ जाती हैं ऊंची चोटियां।


अथाह परिश्रम है इनका प्रण,

कर्मक्षेत्र है उनका रण।


नहीं है जग में ऐसा उपमान,

कोई करता नहीं उद्यम इनके समान।


प्रेरणा देती हैं मुझे ये नदियां,

जन्मदात्री हैं हिमालय की चोटियां।


स्वयं अपने रास्ते बनातीं हैं,

जो शांति से लम्बा सफर तय करती हैं।


न जाने कितने खेतों को सींचती हैं,

न जाने कितने जीवों की तृष्णा बुझाती है।


प्रेरणा देते हैं मुझे ये पुष्प,

जो कभी किसी से नहीं होते रुष्ट।


ये सूर्य की भीषण गर्मी सहकर भी,

सर्द हवाओं के थपेड़े सहकर भी,

बारिशों के मौसम में भी भीगते हैं। 

फिर भी न जाने क्यों ये मुस्कुराते रहते हैं ?

Written by Neelam