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हमारे हरि हारिल की लकरी सप्रसंग व्याख्या

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सूरदास के पद - 3 की व्याख्या| Surdas ke pad' explanation in English | सूरदास के पद की व्याख्या Class 10|sandarbh prasang vyakhya|सप्रसंग व्याख्या कैसे करते हैं|संदर्भ प्रसंग व्याख्या कैसे लिखें|सप्रसंग व्याख्या कैसे करें|सप्रसंग व्याख्या करें|संदर्भ प्रसंग व्याख्या|sprasang vyakhya| संदर्भ प्रसंग सहित व्याख्या कीजिए |सप्रसंग व्याख्या कीजिए|saprasang vyakhya kaise karte hain|how to write sandarbh in hindi हमारें हरि हारिल की लकरी। मन क्रम बचन नंद-नंदन उर, यह दृढ़ करि पकरी।  जागत सोवत स्वप्न दिवस-निसि, काह-कान्ह जक री।  सुनत जोग लागत है ऐसी, ज्याँ करुई ककरी। सु तौ ब्याधि हमकाँ ले आए, देखी सुनी न करी । यह तौ ' सूर ' तिनहिं लै सौंपी, जिनके मन चकरी।। कठिन शब्दार्थ - हारिल - हरे रंग का कबूतर   । लकरी - लकड़ी। क्रम - कर्म।  उर - ह्रदय। दृढ़ - प्रगाढ़। जक - हठ । करुई - कड़वी । ककरी - ककड़ी। ब्याधि - पीड़ा। संदर्भ प्रसंग - प्रस्तुत पद महाकवि सूरदास द्वारा रचित सूर-सारावली के भ्रमरगीत प्रसंग से लिया गया है।  इस पद में गोपियों ज्ञान एवं योग की बातें सिखाने आए उ...

Hindi poems related on vegetables of 12 lines

  भिंडी चली बाजार, बैंगन करें पुकार चले चलो। करेला कूदे कद्दू उछले , गोभी बोले मुझे क्यूं भूले मुझे ले चलो। पालक का क्या कहना, ये है मेथी की बहना संग में चले चलो । टिंडें की छूटी सिसकी , खीरे से भरी मटकी ना छोड़ चलो। देख के गाजर की लाली, मूली की बज गई ताली चलते चलो। लौकी तो बहुत इतराई, सामने देख के तोरई इसे छोड़ चलो। देख के लाल चुकंदर , शलजम जल जाती अंदर ही अंदर थोड़ा ठहर चलो। टमाटर को हम क्यों गये भूल , आलू तो है इन सब का मूल सबको ले चलो। हल्दी बोली जल्दी जल्दी, हरी मटर में इतनी देर क्यों कर दी संग में चले चलो। अरे सेम को लग गया जाड़ा , आके बोला सिंघाड़ा इसे यहीं छोड़ चलो। ब्रोकली के मन में आया विचार, काचरी के साथ में है निपट ग् वार एकला चले चलो। सांगरी का मिलना है दुर्लभ, प्याज होती आसान सुलभ ढूंढते चलो।

कविता रास्ते | Hindi poem path

 छोटा हमारा मकान है हम अकेले हो और रास्ते हमारे सुनसान हैं        चारों ओर शोर है       क्या करें हम बुराई यहां घनघोर हैं थोड़े से नहीं बहुत अलग है हम औरों से एक तरफ घर की परेशानी दूसरी तरफ हमारा आलस फंस गए हम दोनों और से लेकिन हम डरेंगे नहीं क्योंकि प्रकृति के बच्चे हैं हम  उस ईश्वर के बच्चे हैं हम ऐसी परेशानियों से मरेंगे नहीं कर काम तू तेरे साथ भगवान है छोटा हमारा मकान है  हम अकेले और रास्ते हमारे सुनसान हैं कहने को हमारे रास्ते सुनसान हैं लेकिन असल में हम पीछे  और बाकी हूं मैं बढ़ने के लिए घमासान है

कविता तू चल |Hindi motivational poem

  अगर तुमने चलने की ठानी है, तो चल तू !  अगर जिंदगी खुशहाल बनानी है, तो आगे निकल तू ! मंजिल तक पहुंचना है सोचता रह - सोचता रह... खुदा भी मिलेगा मंजिल भी मिलेगी खोजता रह... कर लक्ष्य निर्धारित मंजिल के लिए। अगर बना रखा है कोई नक्शा अपनी मंजिल के लिए, तो पहुंचता है पहुंचता रह... अगर चारों ओर अंधेरा है और बंद कमरा है सोचो मत ज्यादा होगी तेरे लिए यह बेकार रात,  औरों के लिए सवेरा है। कमरे में होगा कोई सुराख खोजता रह खोजता रह... अगर टूट जाए तो मायूस मत होना क्योंकि... तोड़ना दूसरों को इस दुनिया का काम रोज का है। चाहे तो पत्थर को मूर्ति बनाएं चाहे तो मूर्ति भगवान कहलाए पत्थर को मूर्ति तुझे बनाना है पत्थर को खरोंचता रह खरोंचता रह...। written by- super C.M.   

मंजिल को पाना है आसान कविता | Motivational Hindi poem

मंजिल को पाना है आसान कविता | Motivational Hindi poem  Written✍ by super CM तेरे सामने है तेरा मुकाम चल कर तो देख रही मंजिल को पाना है आसान यह दुनिया दे चाहे ताने हजार तू कर नहीं सकता, आगे बढ़ नहीं सकता, यहीं रुक जा तू है बेकार अब तुझे इस दुनिया को , शख्स नहीं "शख्सियत" बनकर दिखाना है तुझे पत्थर नहीं , प हाड़ बन जाना है कर मेहनत और बन आसमान आग है तेरे दिल में  तू अब बन महान तेरे सामने है तेरा मुकाम चल कर तो देख रही "हर मंजिल को पाना है आसान" कलम कागज कभी उठाया नहीं और चले हमारे लिए कानून बनाने यह करो यह मत करो चले हमें सिखाने मत सुन  इनकी बातें उठ खड़ा हो और कर कुछ काम कोई साथ हो ना हो तेरे चल तू आगे क्योंकि साथ खड़ा तेरे, तेरा भगवान तेरे सामने है तेरा मुकाम चल कर तो देख राही तेरे साथ खड़ा है तेरा भगवान  ➡ Motivational poem प्रयास ➡  प्रेरणा कविता

women poem in Hindi | स्त्री कविता

 कैद में है वो घर की चहारदीवारी में    मुक्त हवाओं सी बहने दो हरदम क्यों रहता क्रंदन मन में खिल खिलाकर उसे हंसने दो हृदय में हजारों सपने संजोए हुए इन सपनों को उड़ान भरने दो रहती हो हरदम गुमसुम कभी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने दो जो आती है बाधाएं पथ में उसे इन बाधाओं से लड़ने दो गुमनामी के अंधेरों में खो गई है जो तुम्हारी पहचान अपना एक मुकाम बनाने दो। Written by - Neelam women poem in Hindi image

समय का महत्व कविता | Importance of time poem in hindi | Value of time poem

हिंदी कविता |समय का महत्व|importance of time|Hindi poem घड़ी हमें समय बताती है,  मत करो बर्बाद अपने आप को  यह  बार-बार सिखाती है। पल-पल समय निकल रहा है, जो करते मेहनत,  उनका भविष्य संवर रहा है। जो नहीं करते कुछ भी,   उनका भविष्य बिखर रहा है। एक बात सुन लो !  वक्त के साथ मनुष्य को चलना पड़ता है।  वक्त मनुष्य के अनुसार नहीं चलता है, घड़ी हमें समय बताती है । क्या किया भला और बुरा ?  हमें आईना दिखाती है। एक रोशनी के साथ हर रोज,  एक सूरज निकलता है। लेकिन ! जो चले वक्त के साथ,   वही फूल जैसा खिलता है। वक्त को खोना मेरी फितरत में नहीं ह, सी.एम. ने यह बात न जाने कितनों को कही है। वक्त दोबारा लौटकर नहीं आने वाला,    कोई तुम्हें बार-बार नहीं बताने वाला। जरा सोच कर देखो गहराई में,   वक्त की कीमत का पता चल जाएगा। वरना इस कल-कल के चक्कर में आज भी निकल जाएगा, घड़ी हमें समय बताती है ।         written by - copyright©Super C.M.   all rights reserved  

2 Poems on Corona | Corona par 2 kavitayein

  एक नई सुबह के साथ नया डर था चारों ओर कोरोना का कहर था अच्छे बुरे सब चलने बने            कुछ पराए और कुछ अपनी सीएम की सांसे धीमी होती गईं            उम्मीद की किरण में सोती गई सब पौधे दोस्त हमारे सब डर गए कोरोना के मारे पढ़ाई लिखाई अब हो गई बंद  दुनिया में था कोरोना बुलन्द मार्च , मई जून सब बीत गए  सिक्ख हो या अंग्रेज सब बीत गए  लाहौर पंजाब हरियाणा          किसी ने कोरोना को न माना। बीमारी तोड़ देती है इंसान की मति सारी हानि होती है भारी जब आया कोरोना   पड़ा दुनिया को  रोना कुछ अच्छा कुछ बुरा जिसकी सहनशीलता को ललकारा चिकित्सा में मोटा पैसा कमाया और गरीबों ने अपनों को गंवाया कई आए कई गए जो थे कोरोना से ग्रस्त गहरी नींद सो गए गरीब लोग भूखे मरते नेता भी फायदा उठाकर नित नहीं वादे करते सबको याद आया कसरत और योगा करने लगे भविष्यवाणी लोग पहन के जोगा सबने अच्छा मौका पाया कुछ नहीं कोरोना का बहाना बनाया सब ने उंगली उठाई कोरोना की वजह चीन की छेड़छाड़ बताई ।

हिंदुस्तान है प्यारा कविता | Hindustan he pyara Kavita

  हिंदुस्तान की मिट्टी मेरी जिस पर दिल जान है न्योछावर सब दुश्मन कांपे पर देख कर इंडियन आर्मी की पावर इस देश पर करते सब अभिमान झुकते सब देश देखकर चीन , श्रीलंका हो या पाकिस्तान कोरोना के खिलाफ देखकर भारतीय जनता की तैयारी पड़ी है चीन जैसे दुश्मनों पर मार भारी विभिन्नता में एकता वाला देश हमारा रंग बिरंगा हिंदुस्तान है प्यारा ।   आजादी की लड़ाई हिंदी कविता poem written by super CM Copyright © 2020  All Right Reseved

Makar Sankranti Kavita | मकर संक्रांति पर कविता

  makar sankranti kavita किसने कहा पतंग उड़ाना आसान है,    पतंग उड़ाना होता है कठिन । रंग बिरंगी पतंगों से भरा आसमान है, आज सूर्योदय से पूर्व उठकर ।  नहा - धोकर तैयार होकर, लें चरखी- मांझा, रंग-बिरंगी पतंग । साथ में खाने- पीने का भी सामान है, गए जैसे ही छत पर, किसी ने कहा नीचे आओ, हम गए डर ! क्योंकि आवाज थी बड़ी भयंकर  । पहले पापा ने बोला बीमार पड़ जाओगे, फिर बाबा ने बोला नीचे गिर जाओगे, एक-एक कर सब ने डांट लगाई, वह चाहे मम्मी बुआ ताऊ हो या ताई। डांट कर लग गए सब काम पे,  मौका पाकर चल गए छत पे, बच्चे थे हम  ****  गांम  के, किसने कहा पतंग उड़ाना आसान है ? पतंग उड़ाना होता है कठिन । आज रंग बिरंगी पतंगों से भरा आसमान है। पहले पतंग में ताना डाला, चरखे से धागा निकालकर, छुट्टी दे जनाब  पेड़ आ गया बीच में, मानो हो जैसे हड्डी में कबाब । थोड़ी देर ठहर का हवा ने रुख मोड़ा , तभी कोरव ने अपने दांतो से पतंग को तोड़ा । फिर दादी ने खाने के लिए आवाज लगाई  हमने बड़ी मुश्किल से पतंग चढ़ाई ‌। हमने मांझा नहीं खरीदा, सादा धागा वह भी उड़ाया संभल कर निर्दो...

प्रयास कविता | Prayas par kavita

   प्रयास कविता   न हार मान तू कर प्रयास बार - बार, भले ही मिले असफलता हजार बार । सीखने की ललक हृदय में रख अनवरत, बैठा रह गया जो यूं बन के जडव़त। अधर में ही जो छोड़ दी करनी मेहनत,  न सीख पायेगा न कभी मिलेगी जीत। रुका जो यूं कभी नहीं मिलेगी मंजिलें , ठहरने के बाद दे चाहे जितनी भी दलीलें । मिलेगा कुछ न आयेगा कुछ तेरे हाथ, विविध राहें भी छोड़ देंगी तेरा साथ। अनेक कोशिशों में भी अर्थ होता है, एकाधिक प्रयत्न कब व्यर्थ होता है ? कर्तव्य की राह में कई बाधाएं आएंगी , अविविक्त प्रकार से हर बार सताएंगी। उन ह्रस्व चींटियों से कर ग्रहण अधिगम, जो करतीं हैं बारम्बार सतत्  उपक्रम । न समझ आये तो सीख ले नदी से, वो तलाश कर बनातीं हैं तदबीर खुदी से। भयभीत होकर इनसे न घबराना, पीछे मुड़के न देख आगे बढ़ते ही जाना । written by 🖋️ NEELAM कठिन शब्दार्थ :- जड़वत - मूर्खतपूर्वक, दलीलें - तर्क युक्ति , एकाधिक -कई बार , अविविक्त - अनेक , ह्रस्व -छोटी ,ग्रहण - अपनाना ।अधिगम - सीखना ,विद्वता । सतत - लगातार ।उपक्रम - कार्य । तदबीर- रास्ता ।

प्रेरणा कविता | Prerana dene wali kavita

  प्रेरणा कविता प्रेरणा देती हैं मुझे ये धरा , जो हम सब को देती है वत्सल निरा। हमारा पालन-पोषण करती है, हमें अपनी गोद में उठाए घूमती है । बिना रुके बिना थके अपनी धुरी पर, ममता से भरा हुआ ह्रदय लेकर। प्रेरणा देते हैं मुझे ये खग, नीला अम्बर है इनका जग। जो आंधियों में भी उड़ानें भरते  हैं,  फड़फड़ा कर बार - बार गिरते हैं। कभी कमजोर नहीं हुआ इनका हौंसला, तिनका- तिनका जोड़ ये बनाते घोंसला। प्रेरणा देती हैं मुझे ये चींटियां , जो चढ़ जाती हैं ऊंची चोटियां। अथाह परिश्रम है इनका प्रण, कर्मक्षेत्र है उनका रण। नहीं है जग में ऐसा उपमान, कोई करता नहीं उद्यम इनके समान। प्रेरणा देती हैं मुझे ये नदियां, जन्मदात्री हैं हिमालय की चोटियां। स्वयं अपने रास्ते बनातीं हैं, जो शांति से लम्बा सफर तय करती हैं। न जाने कितने खेतों को सींचती हैं, न जाने कितने जीवों की तृष्णा बुझाती है। प्रेरणा देते हैं मुझे ये पुष्प, जो कभी किसी से नहीं होते रुष्ट। ये सूर्य की भीषण गर्मी सहकर भी, सर्द हवाओं के थपेड़े सहकर भी, बारिशों के मौसम में भी भीगते हैं।  फिर भी न जाने क्यों ये मुस्कुराते रहते हैं ? Written...

आशीष हिंदी कविता | blessing poem | Ashish kavita

कविता   झुका है तुम्हारा जो शीष, हम देते हैं तुमको आशीष। इस जीवन पथ पर, अपनी इंद्रियों को वश में कर। ज्ञान का दीपक जलाकर, अंधेरों का सामना करना डटकर, पाना विजय हर एक बाधा पर। झुका है तुम्हारा जो शीष, हम देते हैं तुमको आशीष। ना करना तुम कभी अभिमान, करना ना किसी का अपमान। सबसे मिल जुल कर रहना, अकिंचन का सहयोग करना। कर्तव्य पथ पर कभी ना रुकना, सरल सरिता बनकर बहना। झुका है तुम्हारा जो शीष, हम देते हैं तुमको आशीष। क्षितिज की ऊंचाइयों को छू कर भी, रखना अपने पांव जमीन पर । नीलम द्वारा लिखित

मेरी कहानी मेरी कविता | My story My poem in hindi

meri kahani kavita   लोगों के मन में बहुत कालिख है, सीएम अपनी मनमर्जी का मालिक है।  मैं जब छोटा बच्चा था, तभी अच्छा था ! वो बीता समय अब तो नहीं आएगा, लेकिन यह  मुसाफिर कुछ बताएगा। लाड प्यार से मैं पला था,  खुली आंखें लेकर चला था ।  मैं बड़ा मनमौजी था, मस्ती का खोजी था। लोगों के मन में बहुत कालिख है, ये सीएम अपनी मनमर्जी का मालिक है। मुझे नहीं तो शादियों का शौक,  किसमें में दम था जो सीएम को ले रोक। बच्चा बड़ा हुआ, जूनियर से सीनियर बन खड़ा हुआ। खेल कम पढ़ाई ज्यादा, पेरेंट्स टॉप करने पर प्रॉमिस का वादा। धीरे-धीरे समय निकल रहा था, अच्छी बुरी बातें सीख रहा था। मैं सबसे अलग था, छोटी-छोटी बातों पर भड़क जाता था। सीएम ने पुराने स्कूल को छोड़ा  था, अपनी लाइफ को नई दिशा में मोड़ा था। लोगों ने तालियां बजा दी है, घर वालों ने लकीर का फकीर बनने की सजा दी है।  आप अपनी पढ़ाई पर कायम रहें,  बड़े हो गए हैं अपने आदतें सुधार लो।  मैं तो पत्थर की लकीर मिटता नहीं,  बिना ब्रेक का खिलाड़ी रुकता नहीं है।  हारना बुरी बात नहीं है,  हारके मुस्कुरा दे...

सर्दी कविता | Sardi kavita | Winter hindi poem

   सर्दी कविता sardi kavita सर्दी आ गया भाई,          ओढ़ लो रजाई! किसी को खांसी तो किसी को बुखार है,           बच्चे बूढ़े खांसे जोर से। कुत्ते बिल्ली बोले,      आह ठंडी हवा चलती है चारों ओर से। सब लोगों के दांत किट- किट करते हैं,         क्या बताएं जनाब ? इंसान तो इंसान मच्छर भी,  गर्म हवा के लिए मरते हैं।       सर्दी आ गया भाई, ओढ़ लो रजाई !         अस्पताल में भर्ती मरीज, कुछ नए और कुछ पुराने हैं।         कुछ डॉ साहब की सुनते हैं, और बाकी कम दिमाग हैं।               ये सीएम बड़ा हैरान है, मच्छरों की गुस्ताखी देखकर परेशान है।           बिना इजाजत के घर में घुस आते हैं, बेसुरा गाना सुनाते हैं ।             मच्छरों ने तो व्यापार बढ़ाया है,  कहता है तो हमने मोर्टीन लगाया है।           कीमती खून को पीते हैं, सीएम...

किसान का दर्द कविता

kisan ka dard kavita   दिन रात करता हूं मेहनत,       तुम खाकर बर्गर बनाते हो सेहत ! मैं तपती धूप में हल जोतता हूं,      जानवरों को फसल खाने से रोकता हूं। तुम मंदिर मस्जिद रोज जाते हो,      क्या कभी किसान की हालत देख ले एक बार भी आते हो। खेतों के हो गए टुकड़े,     पसीने में लथपथ रहते हैं हमारे मुखड़े । कारखानों की गंदगी मिलाई पानी में,    कर्ज की वजह से लगाई फांसी जवानी में। बच्चों के लिए पढ़ाई नहीं है,      बूढ़ों के लिए दवाई नहीं है। तुम्हें चाहिए एसी और हिटर,     किसान के बेटे के पास नहीं है अच्छा टीचर। भूखे रहकर करता हूं पैदा अनाज, बाढ़  में कोई नहीं है सुनता मेरी आवाज। क्या हमने तुम्हें वोट दिया नहीं,  फिर क्यों तुमने हमारा कर्ज माफ किया नहीं ? इस दुनिया में कोई भगवान है,        तो वह गरीब किसान है । Written by Chhavi Mishra.

मौसम है बारिशों का कविता

कविता   मौसम है बारिश  का, मन की ख्वाहिशों का । हवाएं भी तेज चल रही है,  धूप भी तेज निकल रही है । बूंदाबांदी हो रही है, यह दुनिया अभी भी सो रही है । जाग जाओ यारों, तितलियां कह रही है। मौसम है बारिशों का, मन की ख्वाहिशों का ।  मेंढकों ने भी टर्र टर्र ,  करना शुरू कर दिया है । बादलों ने भी इंद्रधनुष में,  रंगों को भर दिया है । कहीं बाढ़ आ रही है , तो कहीं जानें जा रही हैं । बिजली कड़की,  अब तो जनता भड़की।  जनता के दिन खोटे , चाय पकौड़ा छोड़  नेता सत्ता में लौटे । यूपी बिहार में हाहाकार , हर जगह है डूबी मोटर कार।  आज बिजली गिरी,  हो गई मौत तीसरी  हर जगह यही है समाचार । मौसम है बारिशों का, मन की ख्वाहिशों का ।

आजादी की लड़ाई हिंदी कविता

                        कविता भारत पर तिरंगा फहराया था, क्योंकि  देशभक्तों ने खून बहाया था।  हिंदुस्तान में मुगलों की नींव रखने बाबर आया था,     मंदिरों को लूट कर मस्जिद बनाई गई थी। जब लुटेरों ने देश पर नजर गड़ा दी,                     तब किसानों को धीरे-धीरे लूटा,  भारत का दिल दिल्ली टूटा ।                 राजवंशों ने तलवार उठाई थी, कई लोगों ने जान लिया था।                भरत पर तिरंगा फहराया था, क्योंकि देश भक्तों ने खून बहाया था।       अब मुगलों से लड़ने मराठा आ गया था, जीजाबाई का शिवा आया था।            धूल चटा कर घोड़ों से गिरा कर, जिस पर मुगलों को भगाया था।              गरीबों का मददगार था एक हाथ में भाला था एक हाथ में तलवार,               किसानों के जीवन म...

जन्मदिन कविता birthday poem

जन्मदिन  कविता birthday poem पता है आज कौन सा day है ?  मेरी बहन का birthday है । दिन-रात है रहता,                        हमें उनका इंतजार  कब आएगी - कब आएगी ?                          यहीं सोचता है, ये c.m. हजार बार । उनकी आंखें हैं कटोरी जैसी,            फूलों की तरह उनकी मुस्कान है। जो करती संघर्ष,           Somya Pandey उनका नाम है। बच्चों की तरह सब के साथ,                  घुल-मिल जाती है वो । अपने तो अपने,           जनाब परायों को भी हंसाती है वो । पढ़ाई में है लगन,                          क्या शादी क्या ब्याह ? जिंदगी को संवारने में लगता है मन । पता है आज कौन सा day है ? मेरी बहन का birthday है । छोटी-सी उम्र में,           ...

deepak kavita दीपक कविता

कविता    मैं एक नन्हा - सा दीपक हूं । भव्य - दिवाकर का यमक हू , कादम्बरी राहों की चमक हूं, रजनी के साम्राज्य में व्यापक हूं । तूफानों ने की कोशिशें मुझे बुझाने की, हुई बहुत चेष्टा मेरा अस्तित्व मिटाने की । फिर भी हार नहीं मानूंगा मैं नीरव, डटा रहूंगा जब तक है मुझमें विभव । नहीं रुकूंगा क्षणिक ,असंभव है पराभव, आंधियां करें चाहे जितना तांडव । कर्त्तव्य विमुख नहीं होऊंगा तनिक, मेरी प्रभा पर दृढ़ आस्तिक हैं पथिक। इस तिमिर सागर में नहीं हूं एकाकी, मेरे साथ जल रहे हैं तेल और बाती  ।                                   प्रांगण जगमग करने को हूं उद्यत, निशा का भय नहीं मुझको मैं हूं उद्योत ।।              Written by 🖋 Neelam शब्दार्थ :-भव्य -बड़ा ,दिवाकर -सूर्य,यमक-निचोड़ ,कादम्बरी-रात,  रजनी-रात , व्यापक- विस्तृत , अस्तित्व- जीवन , नीरव - शांत , विभव - क्षमता , पराभव - हारना ,तांडव - ज्यादती ।विमुख - हटना । प्रभा -चमक । दृढ़-स्थायी । आस्तिक- विश्वास करन...