Posts

Showing posts with the label Hindi kahaniyan

Surdas ke pad 4 explanation | Sandarbh Prasang Vyakhya

Image
         Surdas ke pad 4 explanation in english | Sandarbh Prasang Vyakhya in Hindi |सूरदास के पद की व्याख्या Class 10  'हरि है राजनीति पढ़ि आए ' संदर्भ तथा प्रसंग - महाकवि सूरदास द्वारा रचित सूरसागर के भ्रमरगीत प्रसंग से यह पद लिया गया है । इस पद में योग संदेश देने आए उद्धव को गोपियां कृष्ण के प्रति अपने प्रेम का उलाहना दे रही है, उनका कहना है कि श्री कृष्ण ने राजनीति सीख ली है और उसी का प्रयोग हमें योग संदेश देकर कर रहे हैं। Surdas ke pad 4 explanation| Sandarbh Prasang Vyakhya    व्याख्या -  कृष्ण के द्वारा भेजे गए उद्धव के मुख से योग संदेश सुनकर गोपियां कह रही है कि  श्री कृष्ण पहले से ही बहुत चतुर है ऊपर से अपने गुरु से राजनीति भी सीख ली है और उसका प्रयोग यह हम पर कर रहे हैं।  आगे गोपियां व्यंग्य करते हुए कहती है कि उनकी बुद्धि इतनी बड़ी हो गई है कि हम युवतियों को वह योग साधना का संदेश भिजवा रहे हैं अर्थात वह बुद्धिमान न होकर मूर्ख है क्योंकि कोई मूर्ख ही प्रेमी युवतियों के लिए योग साधना को उचित मान सकता है बुद्धिमान नह...

सर्वनाम| Hindi sarvnam| Hindi pronoun

  सर्वनाम (sarvnam) Pronouns - Words used in place of nouns are called pronouns.  For example, I, you, her, her etc.  The literal meaning of the sarvnam (pronoun) is "everyone's name". Pronouns are used to remove repetition of nouns and to preserve the beauty of the sentence. Types of pronoun -  1 - पुरुषवाचक सर्वनाम ( purushvachak sarvnam) personal pronoun - Those who hear and understand the pronoun about whom they are talking are called personal pronouns.  EXAMPLE -:  मैं       - Main   - I  तुम.    - Tum    - You वह     - Vah     - He/ she हम    - Ham    - We आप   - Aap.    - You ( by respect) वे       - ve.      -  They  Types of Personal Pronouns -: (A) उत्तम पुरुष ( uttam purush) First person pronoun -  The pronoun that the speaker uses for himself It is called first p...

हिंदी कहानी गधे की चतुराई | Hindi story

 एक समय की बात है एक बार एक कुम्हार था। कुम्हार के पास एक गधा था जो कि बूढ़ा हो चुका था। कुम्हार ने सोचा कि अब यह गधा मेरे किसी काम का नहीं रहा खाली बैठे बैठे यह खाएगा ही और मुझे इसकी केवल सेवा ही करनी पड़ेगी मुझे इससे कोई फायदा नहीं है।  कुम्हार ने गधे को मारने की सोची। और वह उस गधे को अपने खेत पर ले गया। वहां जाकर फावड़े से कुम्हार ने गड्ढा खोदना शुरू किया। गधा बहुत ही समझदार था, वह सारी बात समझ गया कि कुम्हार उस से पीछा छुड़ाना चाहता है। जब कुम्हार ने गड्ढा खोद लिया तो गधे को उस में धक्का दे दिया और ऊपर से मिट्टी गिराने लगा जैसे तैसे गधे ने हिम्मत करके खड़े होने की कोशिश की और जितनी बार कुम्हार गधे के ऊपर मिट्टी फेंकता उतनी बार गधा हिल हिल कर उस मिट्टी को अपने पीठ पर से गिरा देता और मिट्टी गधे के पैरों में जाकर गधे को और ऊंचा कर देती। ऐसा करते-करते सारी मिट्टी कुमार ने गड्ढे में डाल दी और गड्ढा भर गया । गड्ढा भर जाने पर गधा वहां से आसानी से निकल कर भाग गया और कुम्हार  देखता रह गया ।  शिक्षा :- इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि यह दुनिया आपको हमेशा इसी प्रकार ...

हिंदी कहानी बुरी आदत | Hindi story bad habit

  समय पहले की बात है। एक नाई था । एक बार उसके पास एक आदमी बाल कटवाने गया । आदमी के बाल काटने के बाद नाई को पता नहीं क्या सूझा कि उसने आदमी की हजामत बनाने के बाद उसके सिर पर एक बार हाथ से ठोक दिया ।   आदमी ने कुछ नहीं कहा। नाई का दुस्साहस बढ़ गया। आवाज इसकी भी हजामत बनाता सबके सिर पर एक बार हाथ पर जरूर ठोक देता । अब सब लोग उससे परेशान होने लगे। सब लोग उसे कुछ कहने से डरते थे और राजा से शिकायत करने से भी क्योंकि वह राजा का भी नाई था ।  1 दिन राजा को हजामत बनवाने थी । तो उसने नाई को बुलवा भेजा। नई हजामत बनाने लगा। हजामत बनाने के बाद नाई  आदत के अनुसार उसने राजा के सिर पर भी एक बार हाथ से ठोक दिया ।   राजा को आया भयंकर गुस्सा और राजा ने नाई के दोनों हाथ काट देने का आदेश दिया ।  > हिंदी कहानी "गधे की चतुराई" > हिंदी कहानी "बादाम का छिलका" > प्रेरणादायक हिंदी कहानी "अपनी राह चलो" > हिंदी कहानी "दीक्षा" > हिंदी कहानी "जितने मुंह उतनी बातें" > हिंदी कहानी "पढ़ाई का महत्व"

हिंदी कहानी बादाम का छिलका

 एक बार एक साहूकार था। वह अत्यधिक धनी होने के साथ-साथ बहुत कंजूस भी था । वह कभी भी किसी की ना तो सहायता करता था और ना ही दान पुण्य करता था। एक दिन साहूकार और उसकी पत्नी बादाम छीलकर खा रहे थे। इतने में एक गरीब भिखारी आकर भीख मांगने लगा। भिखारी द्वारा अत्यधिक विनती करने पर साहूकार ने बादाम का एक छिलका उसे दान में दे दिया। बिहारी छिलका लेकर चला गया।   कुछ दिनों पश्चात् साहूकार कहीं रात के अंधेरे में जा रहा था। रास्ते में एक गड्ढे में वहां जाकर गिर गया। गड्ढे में घनघोर अंधेरा था उसे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। थोड़ी देर बाद उसको एक सर्प की फुसफसाहट सुनाई दी ।    साहूकार डर के मारे "मरामरा" कहने लगा । लगातार मरा मरा कहते हुए रामराम का नाम अनजाने में ही उसके मुंह से निकलने लगा ।    अब सर्प ने साहूकार को देखकर उसकी और काटने दौड़ा। किंतु जैसे सर्प साहूकार को ही डसने के लिए अपना फन उठाता वैसे यह बादाम का छिलका उसके फन के आगे आ  आ जाता एवं साहूकार के जीवन की रक्षा हुई।  इस प्रकार अनजाने में ही लिए गए राम के नाम एवं एक छोटे से छोटा किया गया परोपकार भी व्यक्...

Best motivational story in Hindi | अपनी राह चलो कहानी

यह कहानी सुपर सीएम द्वारा लिखी हुई है । copyright© all rights reserved "super CM" इस कहानी का कहीं और प्रकाशन निषेध है।  एक बार की बात है। एक गांव था उस गांव के अंदर जॉनी नाम का लड़का रहता था। उस गांव के आस-पास कोई बस नहीं गई थी लेकिन जॉनी शहर के अंदर जाकर कोई जॉब करना चाहता था सक्सेस पाना चाहता था। उसी गांव के अंदर थॉमस नाम का एक लड़का रहता था। दोनों को ही जॉब चाहिए थी और दोनों के पास एक ही स्किल थी । इसलिए जॉनी और थॉमस दोनों अपने अपने गांव से बाहर निकले शहर जाने के लिए दोनों को ही जंगल से गुजरना पड़ता था क्योंकि वहां बस तो जाती नहीं थी। थॉमस था जो तैरने में अच्छा था और जॉनी पहाड़ चढ़ने में अच्छा था। जॉनी पहली बार शहर जा रहा था इसलिए उसके गांव के बुजुर्ग लोगों ने उसको एडवाइज दी कि तुम पहाड़ चढ़कर गांव को पार करना सर मैं अच्छे से पहुंच जाओगे क्योंकि तुम पहाड़ चढ़ने में अच्छे हो। दूसरी तरफ थॉमस को एडवाइज दी गई कि तुम नदी तैर कर जाना क्योंकि तुम तैरने मैं अच्छे हो  नदी तैरकर आसानी से पार कर लोगे। दोनों गांव से निकल गए और एक दूसरे का साथ मिला । दोनों को ही दो रास्ते मिले एक रास्...

दीक्षा कहानी | Hindi kahani deeksha

  एक बार एक गुरुकुल में गुरुदेव ने अपने शिष्यों की शिक्षा पूरी की एवं उनकी दीक्षा का समय आ गया। गुरुदेव ने सभी शिष्यों की दीक्षा भी ले ली किंतु उनके दो प्रिय शिष्य जो कि सर्वश्रेष्ठ थे उनकी दीक्षा लेनी बाकी रह गई थी।  गुरुदेव ने उनको एक एक लोटा देकर कहा कि इसे अच्छी तरह से मांजगर साफ कर और साफ स्वच्छ जल भर कर लाओ । दोनों शिष्यों ने अपने गुरु की आज्ञा का पालन किया। एवं लोटे में जल भरने के लिए नदी के किनारे चल पड़े । वहां पहुंचकर दोनों ने लोटा मांजना शुरू किया । गुरुदेव का प्रथम शिष्य जो कि एक राजकुमार था उसने लौटे को अंदर सेक्स केवल एक बार हल्का सा साफ किया और बाहर से रगड़ रगड़ कर मांजने लगा उसको इतना रगड़ा बाहर से कि वह चमकने लगा । किंतु द्वितीय शिष्य जो था वह एक गरीब किसान पुत्र था उसने लोटे को अंदर की तरफ से अधिक रगड़ रगड़ कर महाजना शुरू किया एवं उसकी सफाई अच्छी तरह से कर दी और बाहर से भी की । किसान पुत्र को ऐसा करते देख राजकुमार उस पर हंसने लगा और उसने कहा कि "बाहर से तो सभी देखते हैं अंदर से लौटा कौन देखता है इसलिए तुम मूर्ख हो जो तुम अंदर से इतना सफाई कर रहे हो ।" किसान ...

Jitne muhn utni baten hindi kahani | हिंदी कहानी जितने मुंह उतनी बातें

  हिंदी कहानी - जितने मुंह उतनी बातें बहुत समय पहले एक व्यापारी था उसके पास एक गधा था वह और उसका बेटा प्रत्येक सुबह अपना सामान गधे पर रखकर शहर बेचने जाते थे और शाम को शहर से वापस लौटते समय गधे पर कोई सामान नहीं होता था एक दिन जब शाम को व्यापारी और उसका बेटा गधे के साथ वापस लौट रहे थे तो रास्ते में एक राहगीर व्यापारी से बोला कि - "गधे पर कोई सामान नहीं है। तुम अपने बेटे को गधे  पर बिठा दो।"  व्यापारी को राहगीर की बात उचित लगी उसने अपने बेटे को गधे पर बिठा दिया और आगे चल पड़ा । कुछ दूरी तय करने के बाद उन तीनों को फिर से एक राहगीर मिला बेटे को गधे  पर देखकर बोला बूढ़ा बाप तो पैदल चल रहा है और गधे पर आराम से सवारी कर रहा है ।   व्यापारी का बेटा गधे पर से उतर कर अपने पिता से बोला - "पिताजी आप बैठ जाइए।"  व्यापारी गधे पर बैठ गया और चल पड़ा ।कुछ दूर आगे चलकर फिर से एक और राहगीर मिला उसने कहा कि- "अरे भाई गधे पर अपने बेटे को भी बिठा लो इतना छोटा बच्चा पैदल चल रहा है।" राहगीरके कहने पर व्यापारी और उसके पुत्र गधे पर बैठ कर चल पड़े । गधा वजन अधिक होने के कारण ...