प्रयास कविता | Prayas par kavita
प्रयास कविता
भले ही मिले असफलता हजार बार ।
सीखने की ललक हृदय में रख अनवरत,
बैठा रह गया जो यूं बन के जडव़त।
अधर में ही जो छोड़ दी करनी मेहनत,
न सीख पायेगा न कभी मिलेगी जीत।
रुका जो यूं कभी नहीं मिलेगी मंजिलें ,
ठहरने के बाद दे चाहे जितनी भी दलीलें ।
मिलेगा कुछ न आयेगा कुछ तेरे हाथ,
विविध राहें भी छोड़ देंगी तेरा साथ।
अनेक कोशिशों में भी अर्थ होता है,
एकाधिक प्रयत्न कब व्यर्थ होता है ?
कर्तव्य की राह में कई बाधाएं आएंगी ,
अविविक्त प्रकार से हर बार सताएंगी।
उन ह्रस्व चींटियों से कर ग्रहण अधिगम,
जो करतीं हैं बारम्बार सतत् उपक्रम ।
न समझ आये तो सीख ले नदी से,
वो तलाश कर बनातीं हैं तदबीर खुदी से।
भयभीत होकर इनसे न घबराना,
पीछे मुड़के न देख आगे बढ़ते ही जाना ।
written by 🖋️ NEELAM
कठिन शब्दार्थ :- जड़वत - मूर्खतपूर्वक, दलीलें - तर्क युक्ति , एकाधिक -कई बार , अविविक्त - अनेक , ह्रस्व -छोटी ,ग्रहण - अपनाना ।अधिगम - सीखना ,विद्वता । सतत - लगातार ।उपक्रम - कार्य । तदबीर- रास्ता ।