मौसम है बारिशों का कविता


 मौसम है बारिश  का,

मन की ख्वाहिशों का ।


हवाएं भी तेज चल रही है, 

धूप भी तेज निकल रही है ।


बूंदाबांदी हो रही है,

यह दुनिया अभी भी सो रही है ।


जाग जाओ यारों,

तितलियां कह रही है।


मौसम है बारिशों का,

मन की ख्वाहिशों का ।


 मेंढकों ने भी टर्र टर्र ,

 करना शुरू कर दिया है ।



बादलों ने भी इंद्रधनुष में,

 रंगों को भर दिया है ।


कहीं बाढ़ आ रही है ,

तो कहीं जानें जा रही हैं ।

बिजली कड़की,

 अब तो जनता भड़की।

 जनता के दिन खोटे ,

चाय पकौड़ा छोड़ 

नेता सत्ता में लौटे ।


यूपी बिहार में हाहाकार ,

हर जगह है डूबी मोटर कार।


 आज बिजली गिरी,

 हो गई मौत तीसरी

 हर जगह यही है समाचार ।


मौसम है बारिशों का,

मन की ख्वाहिशों का ।