आजादी की लड़ाई हिंदी कविता
कविता
भारत पर तिरंगा फहराया था, क्योंकि देशभक्तों ने खून बहाया था।
हिंदुस्तान में मुगलों की नींव रखने बाबर आया था,
मंदिरों को लूट कर मस्जिद बनाई गई थी।
जब लुटेरों ने देश पर नजर गड़ा दी,
तब किसानों को
धीरे-धीरे लूटा,
भारत का दिल दिल्ली टूटा ।
राजवंशों ने तलवार उठाई थी,
कई लोगों ने जान लिया था।
भरत पर तिरंगा फहराया था,
क्योंकि देश भक्तों ने खून बहाया था।
अब मुगलों से लड़ने मराठा आ गया था,
जीजाबाई का शिवा आया था।
धूल चटा कर घोड़ों से गिरा कर,
जिस पर मुगलों को भगाया था।
गरीबों का मददगार था
एक हाथ में भाला था एक हाथ में तलवार,
किसानों के जीवन में रंग लाया था।
वही तो छत्रपति शिवाजी कहलाया था,
उन्होंने भी अपना शौर्य दिखाया था।
भरत पर तिरंगा फहराया था,
क्योंकि देश भक्तों ने खून बहाया था।
राणा राणा राणा
महाराणा प्रताप के पास है,
मुगलों के खिलाफ वो है
घोड़ा उसका चेतक था,
मुगलों की सेना का भेदक था
दंगों में घूमता रहा
आदिवासी के गुंडों को सैनिकों के रूप में चुन लिया गया।
हल्दीघाटी के युद्ध में चेतक ने साहस दिखाया था,
राणा चेतक ने अकबर की सेना आई
हड़कंप मचाया था।
पृथ्वीराज का नागदेव कुंभा ने छाप छोड़ी थी,
इतिहास की पंक्तियां अपनी ओर मोड़ी थी।
कई वर्षों तक मुगलों ने,
जमाने पर हक जताया था।
अब तो सात समंदर दूर से ,
नया खतरा आया था।
भारत पर तिरंगा फहराया था,
क्योंकि देश भक्तों ने अपना खून बहाया था।
आया आया आया
लाल काली टोपी वाला आया,
मुगलों से टूट चुके हिंद पर
नया खतरा मंडराया था।
एक गोरा लेकर लाठी व्यापार को भारत आया,
धीरे-धीरे करके राजू पर कब्जा जमाया।
साथ निभाने का वादा किया,
पीछे से उसने धोखा दिया।
तभी काशी में वीरांगना ने जन्म लिया,
मोरोपंत ने उसे मणिकर्णिका का नाम दिया।
बिठूर के पेशवा बाजीराव के महल में पली थी ,
वो नाना साहब की बहन छबीली थी।
तात्या गुरु ने उसके मन में क्रांति जगाई थी,
शस्त्र विद्या सिखाई थी।
आई आई आई झांसी की रानी आई,
मनु से है अब वो लक्ष्मीबाई।
कानपुर से झांसी तक खुशियों का परचम लहराया,
षड्यंत्रकारियों का मन घबराया
झांसी के वारिस और राजा पर खतरा मंडराया।
भरत पर तिरंगा फहराया था,
क्योंकि देश भक्तों ने खून बहाया था।
कुछ अपनों को लेना प्रतिशोध था,
राजा और राजकुमार को दी मौत
और गिर गई रानी।
लेकिन उसने साहस को नहीं खोया,
चिंगारी ज्वालामुखी बन गया था।
पूरे देश में आजादी की लड़ाई थी,
वीरांगना ने भी कसम खाई थी।
बूढ़े भारत में नई जवानी आई थी,
भाग फिरंगी भाग झांसी की रानी आई।
पूरे देश में दहाड़ लगाई,
जिसने अंग्रेजो की नींव हिलाई।
रानी का अंतिम समय आया था,
किसी ने धोके से झांसी का दरवाजा खोला था।
भरत पर तिरंगा फहराया था,
क्योंकि देश भक्तों ने अपना खून बहाया था।
रानी कही जाएगी लेकिन,
हमारे दिल में तो महारानी।
सीएम ने बताया कि गाथा कैसे लिखी जाती है,
कुछ के लिए तो ख्याली है।
वीरांगना की मौत के पीछे,
भारत का उज्जवल भविष्य आया था।
भरत पर तिरंगा फहराया था,
क्योंकि देश भक्तों ने खून बहाया था।
Chhavi Mishra द्वारा लिखी गई कविता