मतदान कविता | Poem on Voting | Kavita Matdan
कविता आज ग्राम पंचायत चुनाव संपन्न हुआ है, जिसे देखकर मेरा मन खिन्न हुआ है। राजनीति में देखो आज लोकतंत्र झुका है एक-एक मत हजार- हजार में बिका है। अरे! ओ मतदाता तुझे धिक्कार है, मतदान तो तेरा अपना अधिकार है। राजनीति की यही गंदी हकीकत है, मतदाता ने अपनी लगाई कीमत है। आज आपने अपना अधिकार बेचा है, कल के बारे में आपने क्या सोचा है? इन पैसों से गरीबी मिटेगी ’ विकास की गाड़ी आगे बढ़ेगी? पंचायत की आई नई सरकार है, रोजगारों की अब क्यों दरकार है। मदिरा - नोट बांटकर बने विजेता किसी काम के नहीं ऐसे नेता अब ये अपनी मनमानी कर पाएंगे सब बेबस होकर यानी डर जाएंगे करोडों रूपयों को चूना लगाएंगे अपने स्वार्थों को यूं ना भुलाएंगे अधिकारों का दुरुपयोग कर मत बड़ा ही अनमोल है ये तेरा मत। 👉 नीलम द्वारा लिखित
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