कविता सांप और आदमी | Hindi poem|Sanp our admi kavita|
| Kavita sanp or admi image |
हिन्दी कविता
" सांप और आदमी "
एक आदमी बड़ा ही भला था
एक दिन जंगल की ओर चला था
राह में उसनेे जो कुछ देखा
वह सचमुच था या कोई धोखा
सांप दबा पड़ा था पत्थर के नीचे
बेसुध निश्चल बेजान आंखें मीचे
आदमी को सांप पर आई दया
उसने उस पर से पत्थर हटा दिया
एकाएक सांप जैसे नींद हो जागा
आदमी की तरफ सरपट भागा
वह अपना फन उठाकर बोला
अरे आदमी । तू कितना भोला
अब तुझे भेदेंगे मेरे ये विषदंत
तेरे जीवन का कर दूंगा अंत
ये सुनकर आदमी रह गया दंग
सारी मोह माया हो गई भंग
आदमी को आया बहुत क्रोध
उसे हो गया सांप के फरेब का बोध
आदमी ने उठाया वही पत्थर
रख दिया फरेबी सांप के ऊपर
अपनी मंजिल की राह चला
सांप कभी किसी के होते हैं भला ?
Written by 👉 Neelam