कविता कविता
| kavita kavita |
हिंदी भाषा को सीखने और समझने में कविता लेखन या पठन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है कविता के माध्यम से कम शब्दों में अधिक विचारों को व्यक्त किया जा सकता है नये तद्भव तथा तद्गम शब्दों का ज्ञान मिलता है।
कविता
कविता मेरे दिमाग में घूम रही है
शब्दों की वर्षा झूम रही है।
दिमाग बोला लिख ले सही मुहुर्त है
इस कविता को पढ़ने वाले
इंसान के रूप में भूत हैं
अच्छा इंसान बनने की कोशिश
में हम बुरे बन जाते हैं
लेकिन क्या कभी बुरा बनने की कोशिश
में अच्छा इंसान बन पाते हैं ?
तभी मेरे पास से एक जनाजा गुजरा
मेरे मन में एक विचार उभरा
ये प्रकृति खामोश होकर भी
बहुत कुछ कह जाती है
मृतक का तो पता नहीं लेकिन
हमें जीवित अच्छे लोगों
की बहुत याद आती है ।
खराब हो गई सोच और
पैर में लग गई मोच तो ,
आप चल नहीं पाएंगे
खराब सोच क्या किसी को बताएंगे ?
जाने का मन नहीं लेकिन जाना पड़ेगा ,
कोई बात नहीं दोस्त फिर
एक बार मुझे कविता
लिखने आना पड़ेगा ,
तभी हवाओं ने भी
अपना रुख मोड़ा
सी.एम. की तरफ
एक खत छोड़ा ,
बोली उड़ने के लिए पंख नहीं,
एक खुली सोच चाहिए
आगे बढ़ने के दोस्त नहीं ,
बस दुनियादारी से
अकेलापन चाहिए ।
न जाने किसने अकेले रहने
वाले को पागल बताया है
दोस्त मानो या ना मानो
इस अकेलेपन ने ही मुझको
एक लेखक बनाया है
फूल- पत्तों ने भी मेरे
साथ गुनगुनाया है
लोगों की सोच से
वाकिफ कराया है
बोले जिंदा लोगों
की कद्र नहीं ,
इन्होंने अर्थी को सजाया है
बार- बार गाड़ियां चलाने से
सड़क टूट जाती हैं
जिंदगी बार - बार धोखा
खाने से टूट जाती है
तो दोस्त जिंदगी को मनाइए
और उस सड़क को
अपने लिए फिर
एक बार सजाइए
बैठा था मैं अकेला
पेड़ के नीचे ,
पंछी अपनी आवाज से
ध्यान मेरा खींचे ,
हवाएं अकेली उड़ रहीं थीं
फिर भी जिंदगी जी रही थीं
पेड़ के पत्ते खिलखिलाएं धूप में
सब कहते हैं बाहर मत घूमो
काले हो जाओगे,
मैंने पेड़ों से पूछा तो पता चला
कोई फर्क नहीं उनके रूप में
जियोगे अकेले,मरोगे अकेले
मत सुनो किसी की
चाहे ये दुनिया तुम्हें
भीड़ में ढकेले
फिर आकर बोला
एक पंछी मुझसे
बड़े लोग रहते क्यों है अकेले
भीड़ में तो सब अंजान हैं
जिन्होंने काटे पेड़
तोड़ा घर मेरा
वो ये भीड़ में छिपे इंसान हैं ।
Written by 🖋️ chhavi Mishra