जीने की चाहत कविता
Jeene ki chahat kavita
जीने कि चाहत है
पढ़ाई ही बेरोजगारी कि राहत है
पढ़ाई के लिए motivation हैं
लेकिन problem तो distraction है
सोचा था पढ़-लिखकर आगे बढ़ जाऊंगा
Class top करके दिखलाऊंगा
क्योंकि
जीने कि चाहत है
पढ़ाई ही बेरोजगारी की राहत है
पता नहीं था कि एक दिन ऐसा आएगा
जब पढ़ा लिखा भी नौकरी के लिए गिड़गिड़ाएगा
अनपढ़ नेता भी अपनी धौंस जमाएगा
चारो ओर भ्रष्टाचार फेलाएगा
क्योंकि
जीने कि चाहत है
पढ़ाई ही बेरोजगारी कि राहत है
पापा बोले इंजिनियर बनना है
Sir बोले school का नाम ऊंचा करना है
लेकिन किसी को नहीं ध्यान
कि student का क्या है ख्याल
घिर गया चारों ओर से
आगे बढ़ा अपने सपने तोड़ के
जीतता गया नये गुण सिखता गया
क्योंकि
जीने कि चाहत है
पढ़ाई ही बेरोजगारी कि राहत है
न जाने नौकरी का नंबर आया कब
Problem में आया तब
अधिकारी रिश्वत मांगे जब
उड़ी खबर उड़ी खबर
माता पिता कि नीची नजर
चारों ओर माता पिता दौड़े
घर बार सब बेच के छोड़े
बच्चे का हुआ बुरा हाल
मां बाप की इज्जत का था सवाल
क्योंकि
जीने कि चाहत है
पढ़ाई ही बेरोजगारी कि राहत है
क्या करना था
बच्चे को जीते जी मरना था
सर पटक पटक के रोऐ सब
अधिकारी मुंह ढक कर सोऐ अब
पूलिस s.I आये
खूब घर जाकर खाएं
इधर से उधर चक्कर और डांट लगाए
मुवावजा दे सरकार लेकिन
लेकिन अब नहीं आयेगा हमारा यार
क्योंकि
जीने कि चाहत है
पढ़ाई ही बेरोजगारी कि राहत है।
Written by -
Chhavi Mishra