निर्भया कविता
निर्भया
कुछ पुरुषों ने आज फिर ऐसा कार्य किया है ,
धरती की मानवता को शर्मसार किया है
घर की बहन बेटी के लिए है रक्षक
बाहर जाते ही बन जाते हैैं भक्षक
गलत उपयोग किया अपने रोष का
क्या अपराध था उस निर्दोष का ?
क्यों दिया तुमने उसको कष्ट
क्यों हो गई बुद्धि तुम्हारी भ्रष्ट
सिर्फ इसलिए कि वो बेटी पराई थी
प्रताड़ित करते लज्जा भी न आई थी
मेरा एक प्रश्न है आज के समाज से
क्या बेटियां नहीं जी सकेंगी नाज से
हर समय भय के साये में जिया है
इस देश में रहती कितनी निर्भया है
पुरुषों ने संस्कारों को बलि चढ़ाया है
समाज यहां कुछ नहीं कर पाया है
क्योंकि ये पुरुष प्रधान समाज है
फिर से रो रही निर्भया आज है
माना कि न्याय उसे मिलेगा कल
लेकिन मेरा प्रश्न यही है प्रतिपल
क्या उसे मिल पायेगा फिर से जीवन
नष्ट हो चुका है जो उसका तन छन ?
Written by 👉 Neelam