कल्याणी: वह नदी जिसे रुद्रपुर ने नाले में बदल दिया

एक नदी, 184 नाले, बारिश का पानी और तैरता हुआ कचरा—आखिर कहानी क्या है?

रुद्रपुर में बारिश शुरू होती है तो एक अजीब विरोधाभास दिखाई देता है।

शहर में एक नदी बहती है - कल्याणी नदी रुद्रपुर ।

फिर भी बारिश के बाद कई जगह पानी भर जाता है।

और जिस नदी में बारिश का पानी आसानी से बह जाना चाहिए, उसी नदी में कचरा तैरता दिखाई देता है।

सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कल्याणी नदी प्रदूषित क्यों है।

सवाल इससे बड़ा है-

जब किसी शहर के बीच एक नदी मौजूद हो, तो फिर बारिश का पानी सड़क पर क्यों खड़ा होता है और नदी में कचरा क्यों बहता है?

यहीं से कल्याणी की कहानी शुरू होती है।

यह कहानी सिर्फ एक नदी के प्रदूषण की नहीं है। यह कहानी है शहरीकरण, सीवेज, औद्योगिक गतिविधियों, कचरे, नदी के घटते प्राकृतिक प्रवाह और नदी के साथ हमारे बदलते रिश्ते की।

और शायद कल्याणी की सबसे बड़ी त्रासदी यही है कि आज बहुत से लोगों के लिए वह नदी से ज्यादा एक नाले जैसी दिखाई देती है।

कल्याणी आखिर है कहाँ?

कल्याणी नदी उत्तराखंड के नैनीताल जिले के टांडा वन क्षेत्र से निकलती है। इसके बाद यह पंतनगर क्षेत्र के कृषि क्षेत्रों से होकर Integrated Industrial Estate (IIE), Pantnagar की ओर जाती है और आगे रुद्रपुर क्षेत्र से होकर गुजरती है। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दस्तावेजों के अनुसार, पंतनगर औद्योगिक क्षेत्र और उसके downstream का लगभग 11.5 किलोमीटर हिस्सा polluted river stretch के रूप में चिन्हित किया गया है। 

यानी कल्याणी का प्रदूषण कोई केवल स्थानीय धारणा या सोशल मीडिया की चर्चा नहीं है।

सरकारी रिकॉर्ड में भी इसकी स्थिति दर्ज है।

Uttarakhand Pollution Control Board (UKPCB) की वेबसाइट पर कल्याणी को राज्य के polluted river stretches में शामिल किया गया है और इसका संबंधित stretch “Downstream of Pantnagar” के रूप में दर्ज है। 

कभी नदी थी, अब नाले जैसी क्यों दिखती है?

नदी को समझने के लिए सिर्फ उसमें दिखाई देने वाले पानी को देखना काफी नहीं है।

नदी की अपनी एक प्राकृतिक धारा होती है।

लेकिन UKPCB के Revised Action Plan में कल्याणी के बारे में एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही गई है:

इस नदी का प्राकृतिक flow बहुत कम है।

और यही बात आगे की पूरी कहानी को समझने में मदद करती है।

जब किसी नदी में प्राकृतिक पानी कम हो और उसमें बाहर से wastewater लगातार आता रहे, तो प्रदूषण का प्रभाव और ज्यादा दिखाई दे सकता है।

UKPCB के दस्तावेज के अनुसार, पंतनगर औद्योगिक क्षेत्र से गुजरते हुए कल्याणी को industrial wastewater और CETP से संबंधित discharge मिलता है। इसके अलावा रुद्रपुर के residential areas से आने वाले municipal drains भी नदी में मिलते हैं। 

यानी नदी में आने वाला पानी सिर्फ बारिश या प्राकृतिक स्रोतों का पानी नहीं रह जाता।

उसमें शहर और उद्योगों से आने वाले पानी का भी हिस्सा जुड़ जाता है।

184 नाले: कल्याणी की सबसे बड़ी कहानी?

कल्याणी की स्थिति को समझने वाला शायद सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा 184 drains का है।

मई 2024 के एक National Green Tribunal से संबंधित रिकॉर्ड में बताया गया कि रुद्रपुर शहर से 184 छोटे-बड़े drains कल्याणी नदी में गिरते हैं। उसी रिकॉर्ड में इन drains के माध्यम से untreated sewage के सीधे नदी में जाने की बात भी दर्ज की गई थी। 

इस एक आंकड़े को कुछ देर के लिए समझिए।

एक तरफ नदी।

दूसरी तरफ शहर।

और शहर के भीतर से निकलने वाले सैकड़ों छोटे-बड़े drainage channels।

जब इनका connection नदी से हो जाता है, तो नदी धीरे-धीरे सिर्फ प्राकृतिक जलधारा नहीं रहती।

वह शहर के wastewater को ले जाने वाली व्यवस्था का हिस्सा बन जाती है।

और यहीं पर एक बड़ा सवाल पैदा होता है:

क्या हमने नदी को साफ रखने की कोशिश की, या नदी को ही शहर की drainage system का हिस्सा बना दिया?

सिर्फ घरेलू सीवेज ही समस्या नहीं है

कल्याणी की कहानी को सिर्फ “लोग कचरा नदी में डालते हैं” कहकर खत्म करना आसान होगा।

लेकिन सरकारी documents इससे कहीं ज्यादा जटिल तस्वीर दिखाते हैं।

UKPCB के action plan के अनुसार, कल्याणी को industrial area से wastewater और residential areas से आने वाले municipal drains दोनों प्रभावित करते हैं। 

पंतनगर में Common Effluent Treatment Plant यानी CETP भी मौजूद है। पुराने action-plan data में इसकी installed capacity 4.0 MLD बताई गई थी और उस समय लगभग 2.5–2.8 MLD wastewater इसके पास आने की बात दर्ज थी। उसी दस्तावेज में कुछ industrial units के CETP से connected न होने और उनके individual ETP होने की स्थिति भी दर्ज थी। 

इसलिए कल्याणी के pollution को समझने के लिए हमें कम-से-कम तीन अलग-अलग चीजों को देखना होगा:

शहर का sewage + industrial wastewater + solid waste/garbage

इन तीनों की समस्या एक जैसी नहीं है।

और इनके समाधान भी एक जैसे नहीं होंगे।

आंकड़े भी बताते हैं कि पानी की गुणवत्ता खराब रही है

अब आते हैं उस चीज पर जिसे आंखों से हमेशा नहीं देखा जा सकता—water quality।

BOD यानी Biochemical Oxygen Demand पानी में मौजूद organic matter को microorganisms द्वारा decompose करने में आवश्यक oxygen की मांग को दर्शाता है। आसान भाषा में कहें तो BOD बढ़ना आम तौर पर इस बात का संकेत है कि पानी में biodegradable organic pollution ज्यादा है।

UKPCB के पुराने monitoring data में कल्याणी के Pantnagar industrial area के upstream और downstream points के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

उदाहरण के लिए 2021 में:

• Upstream BOD: 6.88 mg/L

• Downstream BOD: 26.20 mg/L

उसी वर्ष downstream DO यानी dissolved oxygen 0.48 mg/L दर्ज हुआ था। 

यह सिर्फ कोई छोटी-मोटी गंदगी की बात नहीं है।

यह बताता है कि industrial area के आसपास नदी की water quality में गंभीर deterioration दर्ज किया गया था।

और यह समस्या केवल पुराने records तक सीमित नहीं रही।

CPCB की हालिया प्रकाशित polluted-river-stretch सूची में 2022 और 2023 के observations के आधार पर Kalyani के Pantnagar industrial-area stretch के लिए maximum observed BOD 34 mg/L दर्ज है और इसे Priority Class I में रखा गया है। 

यहाँ एक जरूरी सावधानी है: 34 mg/L को आज यानी 2026 की exact current water quality नहीं माना जाना चाहिए। यह CPCB द्वारा 2022–23 के observations पर आधारित reported maximum है। वर्तमान स्थिति जानने के लिए नवीनतम monitoring data देखना जरूरी होगा।

फिर बारिश में पानी क्यों भरता है?

यही शायद कल्याणी की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है।

पहली नजर में लगता है:

“शहर में नदी है, तो बारिश का पानी नदी में चला जाना चाहिए।”

लेकिन वास्तविकता इतनी सरल नहीं है।

बारिश का पानी नदी तक पहुँचने के लिए प्राकृतिक drainage channels, खुले रास्ते और पर्याप्त river capacity चाहिए।

अगर नदी का channel संकरा या उथला हो जाए, उसमें कचरा जमा हो, आसपास construction या encroachment हो, drains ठीक से काम न करें या drainage system नदी से सही तरीके से जुड़ा न हो—तो भारी बारिश का पानी आसानी से आसपास के इलाकों में फैल सकता है।

कल्याणी के बारे में 2025 की स्थानीय रिपोर्टिंग में encroachment, garbage और नदी के उथले/सिकुड़ते स्वरूप को लेकर चिंता दर्ज की गई थी। 

इसलिए बारिश के समय दिखाई देने वाला waterlogging केवल “बारिश ज्यादा हो गई” वाली कहानी नहीं है।

यह सवाल भी है कि—

शहर का पानी आखिर जा कहाँ रहा है?

और फिर नदी में तैरता हुआ कचरा...

किसी नदी की हालत समझने के लिए कभी-कभी laboratory report से पहले उसकी सतह को देखना ही काफी होता है।

प्लास्टिक।

पॉलीथिन।

घरेलू कचरा।

फेंकी हुई बोतलें।

और बारिश के बाद अलग-अलग जगहों से बहकर आया हुआ solid waste।

जब यह कचरा नदी में पहुँचता है तो समस्या सिर्फ देखने में खराब लगने तक सीमित नहीं रहती।

यह नदी के flow को प्रभावित कर सकता है, aquatic ecosystem को नुकसान पहुँचा सकता है और धीरे-धीरे नदी के channel में जमा होकर drainage capacity को भी प्रभावित कर सकता है।

2025 की स्थानीय रिपोर्टिंग में कल्याणी के किनारे कचरा और अतिक्रमण को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी। उसी वर्ष दूसरी स्थानीय रिपोर्ट में नदी के बढ़ते pollution, industrial waste को लेकर स्थानीय लोगों की चिंताओं और नदी में foam तथा मछलियों की मौत जैसी घटनाओं का उल्लेख किया गया। इन स्थानीय दावों को स्वतंत्र water-quality data से अलग समझना जरूरी है। 

यही वजह है कि इस कहानी में स्थानीय लोगों की observations और official measurements—दोनों की जरूरत है।

क्या कल्याणी को बचाने की कोशिश नहीं हुई?

ऐसा कहना सही नहीं होगा।

कल्याणी के लिए action plan मौजूद है।

UKPCB की official website पर इसका Revised Action Plan for River Kalyani उपलब्ध है। इसमें industrial effluent management, municipal sewage management और river rejuvenation से जुड़े कदमों का उल्लेख है। 

समस्या यह है कि किसी river action plan का होना और नदी की स्थिति का वास्तव में सुधर जाना—दो अलग बातें हैं।

यही वह जगह है जहाँ हमारी investigation आगे जानी चाहिए।

क्या योजना बनी?

कब बनी?

किस department की जिम्मेदारी थी?

कितना काम हुआ?

कितना sewage अभी भी untreated है?

कितने drains को divert या treat किया गया?

Water-quality data में सुधार आया या नहीं?

इन सवालों के जवाब केवल एक सरकारी press release से नहीं मिलेंगे।

इसके लिए हमें अलग-अलग वर्षों के records को सामने रखकर देखना होगा।

कल्याणी सिर्फ रुद्रपुर की कहानी नहीं है

कल्याणी छोटी नदी है।

न Ganga जितनी बड़ी।

न Yamuna जितनी चर्चित।

न Narmada या Godavari जितनी राष्ट्रीय पहचान वाली।

लेकिन शायद इसी वजह से इसकी कहानी और महत्वपूर्ण है।

भारत में ऐसी अनेक छोटी नदियाँ और seasonal streams हैं जो शहरों के फैलने के साथ धीरे-धीरे drainage channels में बदल गईं।

पहले नदी के किनारे शहर बसता था।

फिर शहर नदी के किनारे फैलता गया।

फिर नदी में drains आने लगे।

फिर नदी में कचरा आने लगा।

फिर नदी का flow कम हुआ।

फिर नदी को “नाला” कहा जाने लगा।

और अंत में लोग भूल गए कि वह कभी नदी थी।

कल्याणी इस पूरी प्रक्रिया को बहुत स्पष्ट तरीके से सामने रखती है।

असली सवाल: नदी को साफ करना है या फिर से नदी बनाना है?

कल्याणी को लेकर चर्चा अक्सर pollution तक सीमित रहती है।

लेकिन शायद हमें सवाल थोड़ा बदलना होगा।

सिर्फ नदी का कचरा साफ करने से क्या कल्याणी बच जाएगी?

अगर untreated sewage नदी में आता रहेगा, तो surface से कचरा निकालने का क्या फायदा?

अगर natural flow कम रहेगा, तो pollution dilution कैसे होगा?

अगर drains सीधे नदी में गिरते रहेंगे, तो सफाई कितने समय तक टिकेगी?

अगर riverbed और floodplain पर दबाव बढ़ता रहेगा, तो बारिश का पानी कहाँ जाएगा?

और अगर नदी के किनारे रहने वाले लोग खुद नदी को अपना नहीं मानेंगे, तो उसकी सुरक्षा कौन करेगा?

इसलिए कल्याणी का समाधान केवल clean-up drive नहीं हो सकता।

हमें sewage treatment + industrial compliance + solid-waste management + drainage planning + floodplain/encroachment management + continuous water-quality monitoring को एक साथ देखना होगा।

एक नदी को बचाना सिर्फ पर्यावरण का सवाल नहीं है

कल्याणी की कहानी हमें एक और बात समझाती है।

नदी का स्वास्थ्य और शहर का स्वास्थ्य अलग-अलग चीजें नहीं हैं।

अगर नदी में sewage जा रहा है, तो वह सिर्फ नदी की समस्या नहीं है।

अगर बारिश का पानी शहर में भर रहा है, तो वह सिर्फ drainage की समस्या नहीं है।

अगर नदी में कचरा जमा हो रहा है, तो वह सिर्फ सफाई की समस्या नहीं है।

ये सब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

नदी शहर का हिस्सा है और शहर नदी के watershed का हिस्सा है।

इसलिए कल्याणी को बचाने का सवाल असल में यह पूछने का सवाल है:

हम अपने शहर को किस तरह का शहर बनाना चाहते हैं—ऐसा शहर जो अपनी नदी का इस्तेमाल सिर्फ wastewater के लिए करे, या ऐसा शहर जो अपनी नदी को एक जीवित ecosystem माने?

कल्याणी की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है

शायद सबसे दुखद बात यह नहीं है कि कल्याणी आज प्रदूषित है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कल्याणी अभी भी मौजूद है।

उसका नाम मौजूद है।

उसका channel मौजूद है।

उसमें पानी आता है।

बारिश में उसका महत्व और ज्यादा सामने आता है।

और सरकारी records में भी उसे आज तक river के रूप में ही दर्ज किया गया है—एक polluted river stretch के रूप में।

इसका मतलब है कि कहानी खत्म नहीं हुई।

अगर किसी नदी को हमने नाले जैसा बना दिया है, तो सवाल यह भी है कि क्या उसे फिर से नदी जैसा बनाया जा सकता है?

शायद हाँ।

लेकिन उसके लिए पहले यह स्वीकार करना होगा कि समस्या सिर्फ नदी में नहीं है।

समस्या उस पूरे सिस्टम में है जो नदी तक पहुँचता है।

और कल्याणी हमें वही सिस्टम दिखाती है।

कल्याणी से शुरू होकर...

यह इस series की पहली कहानी है।

आगे हम भारत की दूसरी नदियों की तरफ जाएंगे।

कुछ बड़ी होंगी।

कुछ छोटी।

कुछ के नाम हर भारतीय जानता होगा।

और कुछ ऐसी होंगी जिनका नाम शायद उसी शहर के बहुत कम लोग जानते होंगे।

लेकिन हर नदी से एक ही सवाल पूछा जाएगा:

क्या यह अभी भी नदी है—या हमने इसे अपनी सुविधा के लिए नाले में बदल दिया है?

कल्याणी की कहानी शायद इसी सवाल से शुरू होती है।

और शायद यहीं से भारत की नदियों को नए तरीके से देखने की शुरुआत भी हो सकती है।

स्रोत और आगे की जाँच

• Uttarakhand Pollution Control Board — Revised Action Plan for River Kalyani: नदी का उद्गम, polluted stretch, natural flow, industrial तथा municipal wastewater और action plan. 

• UKPCB — Action Plan for Rejuvenation of Polluted River Stretches: Kalyani को “Downstream of Pantnagar” polluted stretch के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। 

• CPCB — Polluted River Stretches: 2022–23 observations में Kalyani के Pantnagar stretch का maximum observed BOD 34 mg/L दर्ज है। 

• National Green Tribunal proceedings, 2024: Rudrapur से Kalyani में गिरने वाले 184 छोटे-बड़े drains और untreated sewage के direct discharge का उल्लेख। 

• स्थानीय रिपोर्टिंग, 2025: Kalyani में garbage, encroachment और pollution से संबंधित स्थानीय concerns.