Hindi poems related on vegetables of 12 lines

 

भिंडी चली बाजार,बैंगन करें पुकार
चले चलो।
करेला कूदे कद्दू उछले ,गोभी बोले मुझे क्यूं भूले
मुझे ले चलो।
पालक का क्या कहना, ये है मेथी की बहना
संग में चले चलो ।
टिंडें की छूटी सिसकी ,खीरे से भरी मटकी
ना छोड़ चलो।
देख के गाजर की लाली, मूली की बज गई ताली
चलते चलो।
लौकी तो बहुत इतराई, सामने देख के तोरई
इसे छोड़ चलो।
देख के लाल चुकंदर,शलजम जल जाती अंदर ही अंदर
थोड़ा ठहर चलो।
टमाटर को हम क्यों गये भूल ,आलू तो है इन सब का मूल
सबको ले चलो।
हल्दी बोली जल्दी जल्दी, हरी मटर में इतनी देर क्यों कर दी
संग में चले चलो।
अरे सेम को लग गया जाड़ा , आके बोला सिंघाड़ा
इसे यहीं छोड़ चलो।
ब्रोकली के मन में आया विचार, काचरी के साथ में है निपट ग्वार
एकला चले चलो।
सांगरी का मिलना है दुर्लभ,प्याज होती आसान सुलभ
ढूंढते चलो।