Hindi bhasha ka vikas | हिंदी भाषा का उद्भव और विकास

 

Hindi bhasha ka vikas | हिंदी भाषा का उद्भव और विकास

 1 हिंदी शब्दार्थ :- शब्दार्थ की दृष्टि से 'हिंदी'शब्द  का प्रयोग हिंद या भारत में बोली जाने वाली किसी भी आर्य द्रविड़ या  अन्य भाषा के लिए हो सकता है। लेकिन आजकल इसका प्रयोग उत्तर भारत के मध्य प्रदेश के हिंदुओंं की वर्तमान साहित्यिक भाषा के अर्थ में मुख्यत: तथा साथ ही इस भूमि भाग की उपभाषाओं और उनसेेेे संबंध रखने वालेेेेेेेे प्राचीन साहित्यक रूपों के अर्थ में साधारणतयाा होता है।

2. हिंदी शब्द :- हिंदी शब्द का इतिहास बहुत पुराना है। इसका संबंध विद्वानोंं ने संस्कृत शब्द 'सिंधु' शब्द से माना है । 'सिंधु' शब्द का भी कुछ विद्वानों द्वारा द्रविड़़ शब्द 'सिद्' या 'सित्' से

व्युत्पन्न किया गया अर्थात संस्कारित शब्द रूप माना है।

'सिंधु' शब्द का प्रयोग ऋग्वेद काल में दो अर्थों में होता था - प्रथम, सिंधु नदी के लिए, द्वितीय , सिंधु नदी के आसपास की भूमि के लिए।

3. हिंदी शब्द की उत्पत्ति - भारत एवं इरान का आपसी संबंध बहुत पुराना है । हमारी 'स' ध्वनि ईरान की प्राचीन भाषा 'अवेस्ता' में 'ह' उपचारित होती है ।

जैसे - संस्कृत में ' सप्त' अवेस्ता में 'हफ्त' हो जाता है। इसी प्रकार संस्कृत 'सिंधु' शब्द अवेस्ता में 'हिंदू' रूप में मिलता है। यह शब्द वहां पर नदी के अर्थ में प्रयुक्त होता है। साथ ही इसका प्रयोग सिंधु नदी के आसपास की भूमि के लिए किया जाता रहा । ईरान वालों के पास उस समय भारत की भूमि के लिए केवल हिंदू शब्द ही था । वे भारत के जितने भाग से धीरे-धीरे परिचित होते गए हिंदू शब्द का प्रयोग उन सबके लिए करते रहे । इस प्रकार नदी के आसपास की भूमि का वाचक शब्द समस्त भारत का वाचक बन गया। ध्वनि विकास होने पर 'हिंदू' शब्द 'हिंद' हो गया और इसमें ईरानी 'ईक' प्रत्यय लगाने पर 'हिंदीक' शब्द बन गया । इस 'हिंदीक' शब्द का विकास 'क' के लोप होने पर हिंदी के रूप में हुआ, जिसका मूल अर्थ है 'हिंदी या भारतीय' । आगे चलकर इस शब्द का प्रयोग भारत की भाषाओं के अर्थ में होने लगा। छठी शताब्दी ई. के कुछ पूर्व से ही ईरान में 'जबान ए हिंदी' का प्रयोग भारत की भाषाओं के लिए होता रहा है।

4. हिंदी शब्द का प्रयोग भाषा के अर्थ में -: भाषा के अर्थ में प्रयोग मुसलमानों ने किया। भारत के मध्य देेश को मुसलमान 'हिंद' कहते थे । अतः जब वे यहां आए तो यहां कीी भाषा को 'जबान-हिंदी' कहने लगे। इनका विशेष संबंध मध्य प्रदेश से था। मध्य देशीय बोली के लिए उन्होंनेेे 'जबान- हिंदी', 'हिंदी जबान'या हिंदी नाम का प्रयोग किया। यह अभी भी अनुसंधान का विषय मध्य प्रदेश की भाषा के लिए हिंदी शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया।

5. हिंदी और हिंदवी - 'हिंदुवी'और 'हिंदुई' दो अन्य नाम भी हिंदी केे लिए मिलते हैं । यह तीनों शब्द है हिंदी का पर्याय के रूप मेंं प्रयुक्त हुए हैं।

भाषा के अर्थ में प्राचीन साहित्य में हिंदी की अपेक्षा 'हिन्दुई', 'हिन्दई' ,'हिंदवी' शब्दों का प्रयोग हुआ है। इस प्रकार ' हिन्दवी' शब्द हिंदी का पर्यायवाची शब्द है, जिसका प्रयोग मध्यप्रदेश के हिंदुओं की भाषा के अर्थ में हुआ।

6. हिंदी और हिंदवी शब्द का प्रयोग - अनेक विद्वानों द्वारा मत दिया गया है कि 'हिंदवी' या 'हिंदुवी' तो वह भाषा थी जो शौरसेनीी अपभ्रंश से विकसित थी और सहज रूप में मध्यप्रदेश में इस भाषा का प्रयोग हो रहा था । मुसलमानों नेे भी भारत आकर इसे अपनाया किंतु उनकी भाषा में धार्मिक-सांस्कृतिक कारणोंं से अरबी-फारसी और तुर्की भाषा के शब्द अधिकतर थे । और मुसलमानोंं द्वारा ही कदाचित आरंभ में हिंदी शब्द का प्रयोग इस भाषा के लिए कियाा गया। 'हिंदवी' शब्द पुराना है एवं प्रारंभ में उसके मूल अर्थ में  अंतर था । किंतु 'हिंदवी' के अर्थ में ही आगे चलकर हिंदी शब्द प्रयुक्त होने लगा। 

7. उर्दू एवं हिंदी - हिंदी शब्द का प्रयोग मध्य प्रदेश की भाषा के लिए आरंभ में नहीं मिलता। 'हिंदवी' शब्द  का प्रयोग मिलता है। हिंदी के कवि कबीर जायसी तथा तुलसी नेेे अपने काव्य में हिंदी शब्द का प्रयोग ना करके 'भाषा' शब्द का प्रयोग किया है।

हिंदी के अध्यापक गिलक्राइस्ट के लेखों से विदित होता है की वे हिंदी, हिंदुस्तानी और उर्दू को समानार्थी समझते थे। आज की दृष्टि से उर्दू उनकी हिंदी थी। इस प्रकार हिंदी शब्द का प्रयोग 18 वीं शताब्दी के आसपास उर्दू तथा रेख्ता के लिए भी हो रहा था।

8. उर्दू के लिए हिंदी शब्द का प्रयोग और मध्य देश की भाषा के लिए - आरंभ में उस भाषा के लिए ही हिंदी शब्द का प्रयोग प्रायः मिलता है । जिसका निर्माण अरबी-फारसी के शब्दों से हो रहा था और बाद में यह ये वो भाषा थी बाद में इसका नाम उर्दू पड़ा। किंतु अपवाद के रूप में उसका प्रयोग कभी-कभी हिंदुओंं की भाषा या अरबी-फ़ारसी के कठिन शब्दों से रहित मध्य देशीय भाषाा के अर्थ में भी होता था।

9. हिंदुस्तानी-हिंदी -: फोर्ट विलियम कॉलेज के शिक्षकों का शीघ्र ही ध्यान इस ओर गया कि वास्तव में हिंदी वह भाषा है जिसमें अरबी-फारसी शब्दों का नहीं है। अतः हिंदुस्तानी अरबी फारसी रूप के लिए हिंदुस्तानी एवं उनसे रहित भाषा के लिए हिन्दी शब्द का प्रयोग होने लगा । फोर्ट विलियम कॉलेज के कैप्टटन टेलर द्वारा सन 18 सो 12 के वार्षिक प्रतिवेदन से इन दोनों प्रयोगों की स्पष्ट पुष्टि  होती है - " मैं केवल हिंदुस्तानी या रेख्ता का जिक्र कर रहा हूं । जोकि फारसी लिपि मेंं लिखी  जाती है । मैं हिंदी का जिक्र नहीं कर रहा, जिसकी अपनी लिपि है जिसमें अरबी फारसी शब्दों का प्रयोग नहीं होता।"

इस प्रकार स्पष्ट है कि हिंदुओं की उस भाषा के लिए जिसमें अरबी फारसी शब्दों का प्रयोग नहीं था, हिंदी शब्द का प्रयोग आधुनिक है और यह भी स्पष्ट है कि पहले अरबी फारसी शब्दों से युक्त भाषा के लिए हिंदी शब्द का प्रयोग होता था बाद में उसके लिए हिंदुस्तानी का प्रयोग होने लगा जो आगे चलकर उर्दू कहलाई।

10. तीन अर्थों में हिंदी शब्द का प्रयोग आधुनिक समय में - आज केेे समय में निम्नलिखित अर्थों में हिंदी शब्द का प्रयोग हो रहा है - 

(१) ' हिंदी साहित्य के इतिहास' में हिंदी शब्द का अर्थ है - बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, दिल्ली एवं हिमाचल प्रदेश के कुछ भागों की भाषा । ये ही हिंदी प्रदेश हैं।

इस पूरे प्रदेश में उर्दू को छोड़कर सभी भाषाएं एवं बोलियां हिंदी शब्द में समाहित हैं। 

(२) पूर्वी हिंदी एवं पश्चिमी हिंदी के रूप में।

(३) आज की परिनिष्ठित हिंदी के लिए जिस की बोलियां हरियाणवी जाट तथा खड़ी बोली हैं। 

हिंदी भाषी क्षेत्र - हिंदी कहने से साहित्य में उसके खड़ी बोली रूप से प्रयोजन होता है, किंतु प्रभार में हिंदी उस समस्त समुदाय को अपने मेंं समेटे हुए, जो बिहार से लेकर पंजाब तक और उत्तर में हिमालय की मध्य पहाड़ियों लेकर मध्य प्रदेश के दक्षिणी छोर तक एक बड़े जनसमूह द्वारा बोली जाती है।