कविता तू चल |Hindi motivational poem
अगर तुमने चलने की ठानी है, तो चल तू ! अगर जिंदगी खुशहाल बनानी है, तो आगे निकल तू ! मंजिल तक पहुंचना है सोचता रह - सोचता रह... खुदा भी मिलेगा मंजिल भी मिलेगी खोजता रह... कर लक्ष्य निर्धारित मंजिल के लिए। अगर बना रखा है कोई नक्शा अपनी मंजिल के लिए, तो पहुंचता है पहुंचता रह... अगर चारों ओर अंधेरा है और बंद कमरा है सोचो मत ज्यादा होगी तेरे लिए यह बेकार रात, औरों के लिए सवेरा है। कमरे में होगा कोई सुराख खोजता रह खोजता रह... अगर टूट जाए तो मायूस मत होना क्योंकि... तोड़ना दूसरों को इस दुनिया का काम रोज का है। चाहे तो पत्थर को मूर्ति बनाएं चाहे तो मूर्ति भगवान कहलाए पत्थर को मूर्ति तुझे बनाना है पत्थर को खरोंचता रह खरोंचता रह...। written by- super C.M.