women poem in Hindi | स्त्री कविता

 कैद में है वो घर की चहारदीवारी में

   मुक्त हवाओं सी बहने दो

हरदम क्यों रहता क्रंदन मन में

खिल खिलाकर उसे हंसने दो

हृदय में हजारों सपने संजोए हुए

इन सपनों को उड़ान भरने दो

रहती हो हरदम गुमसुम

कभी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने दो

जो आती है बाधाएं पथ में

उसे इन बाधाओं से लड़ने दो

गुमनामी के अंधेरों में खो गई है जो तुम्हारी पहचान

अपना एक मुकाम बनाने दो।

Written by - Neelam




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